Wednesday, June 24, 2026
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चेहरे पर 14 फ्रैक्चर, पहले हटीं गंभीर धाराएं फिर दोबारा जुड़ी धारा 308; पानी की पाइपलाइन विवाद में जांच पर उठे सवाल, पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

दौसा। राजस्थान के दौसा जिले के थाना कोलवा क्षेत्र के नयागांव में पानी की पाइपलाइन को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। इस मामले में घायल पक्ष का आरोप है कि लाठी-डंडों और लोहे के सरियों से किए गए हमले में दो सगे भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। मेडिकल जांच में एक घायल के चेहरे पर 14 फ्रैक्चर सामने आने के बाद पुलिस जांच कई बार बदली, गंभीर धाराएं जोड़ी गईं, फिर हटाई गईं और आखिरकार उच्च स्तरीय जांच में एक बार फिर धारा 308 सहित गंभीर धाराएं प्रमाणित मानी गईं। अब इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस अनुसंधान और कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित हंसराज गुर्जर द्वारा थाना कोलवा में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार 8 अप्रैल 2024 की सुबह वह अपने भाई विश्राम उर्फ बसराम के साथ खेत में क्षतिग्रस्त पानी की पाइपलाइन ठीक कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान रामसिंह, लक्ष्मण, प्यारसिंह, हेमराज सहित अन्य नामजद लोग मौके पर पहुंचे और लाठी-डंडों तथा लोहे के सरियों से हमला कर दिया। हमले में दोनों भाई गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए। परिजन उन्हें पहले दौसा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से विश्राम की गंभीर हालत को देखते हुए जयपुर रेफर कर दिया गया।

जांच के अनुसार इस मामले में आरोपी पक्ष के रूप में हेमराज पिता लक्ष्मण, प्यारसिंह पुत्र लक्ष्मण सिंह, रामसिंह पुत्र रामजीलाल, लक्ष्मण पुत्र रामजीलाल, हेमराज पुत्र लक्ष्मण तथा श्रीमती विमला पत्नी रामसिंह, सभी निवासी नयागांव, थाना कोलवा, जिला दौसा के नाम दर्ज हैं।

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने केवल धारा 143, 341 और 323 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर की सीटी स्कैन रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों में विश्राम के चेहरे के हिस्से में 14 फ्रैक्चर पाए गए। मेडिकल अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि चोटें “Dangerous to Life” श्रेणी में नहीं हैं, लेकिन चेहरे जैसे अत्यंत संवेदनशील हिस्से पर इतनी बड़ी संख्या में फ्रैक्चर मिलने के बाद जांच अधिकारियों ने हमले की गंभीरता और आरोपियों के आपराधिक आशय को देखते हुए धारा 325 और 308 आईपीसी जोड़ने की राय दी।

दस्तावेजों के अनुसार मामले की जांच कई अधिकारियों के हाथों से होकर गुजरी। शुरुआती छह अनुसंधान अधिकारियों ने मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गंभीर गैर-जमानती धाराएं लगाने की अनुशंसा की थी। बाद में एक अनुसंधान अधिकारी ने धारा 307 और 326 सहित अन्य गंभीर धाराओं को हटाकर अपेक्षाकृत हल्की धाराओं में चार्जशीट पेश कर दी। इस निर्णय पर सवाल उठने के बाद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और दोबारा जांच के आदेश दिए गए।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध एवं सतर्कता जयपुर रेंज द्वारा की गई विस्तृत जांच में घटनास्थल का पुनः निरीक्षण, गवाहों के दोबारा बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग, मेडिकल रिपोर्ट, सीटी स्कैन और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। जांच में यह निष्कर्ष सामने आया कि रामसिंह, लक्ष्मण, प्यारसिंह और हेमराज के विरुद्ध धारा 341, 323, 325, 308 और 34 आईपीसी के तहत अपराध प्रमाणित पाए गए। वहीं अन्य नामजद लोगों के विरुद्ध मारपीट में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात जांच रिपोर्ट में दर्ज की गई।

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि घटना की जड़ खेत में दबाई गई पानी की पाइपलाइन थी। ट्रैक्टर से खुदाई के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे ठीक कराने का आश्वासन दिया गया था। कई दिन तक पाइपलाइन ठीक नहीं होने पर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और देखते ही देखते विवाद हिंसक मारपीट में बदल गया। जांच के अनुसार आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को अलग कराया।

मामले में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पुलिस ने अदालत में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश कर पहले से लिए गए जमानत मुचलकों को निरस्त करने का अनुरोध किया। पुलिस का कहना है कि पुनः अनुसंधान और उच्च स्तरीय जांच के बाद धारा 308 सहित गंभीर अपराध प्रमाणित पाए गए हैं, इसलिए पूर्व में की गई कार्रवाई में संशोधन आवश्यक है।

इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार का कहना है कि वे पिछले लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि गंभीर चोटों और मेडिकल साक्ष्यों के बावजूद मामले में कई बार धाराएं बदली गईं, जिससे उन्हें न्याय मिलने में देरी हुई। पीड़ित परिवार ने प्रशासन और न्यायालय से मांग की है कि मामले का शीघ्र निस्तारण कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए ताकि उन्हें समय पर न्याय मिल सके।

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

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