Tuesday, July 7, 2026
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मुजफ्फरनगर में रास्ते के विवाद ने लिया खौफनाक मोड़, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, युवक ने कथित तौर पर जहर खाकर जान देने की कोशिश, पुलिस पर समझौते का दबाव बनाने के गंभीर आरोप

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के थाना भोपा क्षेत्र के ग्राम सिताबपुरी मजरा मजलिसपुर तौफिर में खेत और घर के रास्ते को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर और चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि महीनों पहले पुलिस को लिखित शिकायत देकर जान-माल के खतरे की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण हालात लगातार बिगड़ते गए। परिवार का दावा है कि इसी मानसिक प्रताड़ना, धमकियों और कथित मारपीट से परेशान होकर युवक सुधीर ने जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, जिसकी सूचना मिलते ही उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के बाद उसकी जान बच सकी।

परिवार के अनुसार, अशोक पुत्र राम सिंह ने 25 फरवरी 2026 को थाना भोपा में लिखित शिकायत देकर बताया था कि सहखातेदारों द्वारा उनके खेत तक आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया गया है। विरोध करने पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि 3 फरवरी 2026 को उनकी पत्नी कुसुम और पुत्र सुधीर जब खेत की ओर जा रहे थे, तब आरोपियों ने कथित रूप से उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकले।

परिवार का कहना है कि विवाद केवल खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके घर तक आने-जाने का रास्ता भी बाधित कर दिया गया है। इससे परिवार का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। उनका आरोप है कि कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद न तो रास्ते की समस्या का समाधान कराया गया और न ही आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई की गई।

पीड़ित परिवार ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विवाद के दौरान परिवार की एक महिला की तस्वीर का कथित रूप से दुरुपयोग कर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया। परिवार का कहना है कि इस मामले में संबंधित युवक से कोई पूछताछ नहीं की गई और न ही उसके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। केवल एक अन्य व्यक्ति सोनू को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जिसे उसी रात छोड़ दिया गया।

परिजनों का आरोप है कि लगातार धमकियों, मानसिक प्रताड़ना और पुलिस से न्याय न मिलने के कारण सुधीर गहरे तनाव में आ गया। इसी तनाव के चलते उसने कथित रूप से जहरीला पदार्थ खा लिया। गंभीर हालत में उसे केदार अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उपचार कर उसकी जान बचाई।

परिवार का कहना है कि मारपीट के दौरान सुधीर के सिर, कमर, पेट और गले पर गंभीर चोटें आईं। आरोप है कि उसके गले को दबाने का भी प्रयास किया गया, जिसके निशान आज भी मौजूद हैं। शरीर पर कई स्थानों पर नीले निशान थे और पेट व कमर में लगातार दर्द बना हुआ है, जिसके लिए आगे भी उपचार कराया जा रहा है। परिवार का आरोप है कि मेडिकल परीक्षण के दौरान केवल बाहरी साधारण चोटों का उल्लेख किया गया, जबकि अंदरूनी चोटों और गला दबाने के निशानों को गंभीरता से दर्ज नहीं किया गया। उनका कहना है कि जानबूझकर चोटों को साधारण दिखाया गया ताकि गंभीर धाराएं लागू न हों और आरोपियों को आसानी से राहत मिल सके।

पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के तुरंत बाद डायल 112 पर सूचना दी गई थी। उनके अनुसार मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने स्वयं रास्ते की स्थिति देखी और माना कि रास्ता सही नहीं है। परिवार का दावा है कि पुलिस ने मौके का वीडियो बनाया, जिसमें सुधीर के शरीर पर पड़े नीले निशान भी रिकॉर्ड हुए। यह वीडियो और अन्य रिकॉर्ड थाना पुलिस के पास उपलब्ध हैं।

परिवार का आरोप है कि पांच से छह लोगों, जिनमें एक महिला भी शामिल थी, ने मिलकर सुधीर के साथ मारपीट की। इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों में जान-माल के खतरे का उल्लेख किए जाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें आसानी से कानूनी राहत मिल गई।

पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि उन्होंने हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन निष्पक्ष जांच करने के बजाय पुलिस ने उन पर समझौते का दबाव बनाया। परिवार का दावा है कि जिस शिकायत के आधार पर कार्रवाई होनी थी, उसी मामले में शिकायतकर्ता और संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर के बिना ही चौकी स्तर पर समझौता दिखा दिया गया। इतना ही नहीं, उनके बुजुर्ग पिता को कथित रूप से यह कहकर डराया गया कि यदि समझौता नहीं किया गया तो उन्हें झूठे मुकदमे में फंसा दिया जाएगा।

परिवार का कहना है कि यदि पुलिस प्रारंभिक शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करती, सुरक्षा उपलब्ध कराती और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाती, तो शायद यह स्थिति पैदा नहीं होती। उनका आरोप है कि पुलिस की कथित लापरवाही और निष्क्रियता ने पूरे परिवार को भय, असुरक्षा और मानसिक तनाव के माहौल में जीने के लिए मजबूर कर दिया।

पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, डायल 112 की कॉल रिकॉर्डिंग, मौके पर बनाए गए वीडियो, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कराने, मेडिकल परीक्षण की दोबारा समीक्षा कराने, कथित दबाव बनाकर कराए गए समझौते की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले सभी आरोपियों के साथ-साथ यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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