बालाटोल के ग्रामीणों ने बिहार विधानसभा उपाध्यक्ष से की शिकायत, मधेपुरा डीएम से औचक निरीक्षण कराने और शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग
मधेपुरा जिले के बालाटोल स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पढ़ाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में बच्चे नियमित रूप से पढ़ने पहुंचते हैं, लेकिन कई शिक्षक कक्षाओं में समय देने के बजाय कार्यालय में बैठे रहते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षक यदि कक्षा में जाते भी हैं तो कुर्सी पर बैठकर मोबाइल देखने में समय बिताते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
इस संबंध में बालाटोल के ग्रामीणों की ओर से बिहार विधानसभा उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव को लिखित शिकायत दी गई है। शिकायत में ग्रामीणों ने विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था की जांच कराने और जिला पदाधिकारी, मधेपुरा के माध्यम से विद्यालय का औचक निरीक्षण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जाते हैं और सरकार की ओर से विद्यालय में बच्चों की शिक्षा, मध्याह्न भोजन तथा शिक्षकों के वेतन समेत विभिन्न मदों में बड़ी राशि खर्च की जाती है। इसके बावजूद यदि बच्चों को उचित तरीके से पढ़ाई नहीं मिल रही है तो यह गंभीर विषय है। शिकायत में सरकारी राशि के उपयोग और बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में शिक्षकों की मौजूदगी के बावजूद कक्षा संचालन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि शिक्षक कार्यालय में बैठे रहते हैं और कक्षा में पहुंचने के बाद भी पढ़ाने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए अचानक निरीक्षण कराने की मांग की है।
औचक निरीक्षण से सामने आएगी हकीकत
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि अधिकारियों की ओर से बिना पूर्व सूचना विद्यालय का निरीक्षण कराया जाए तो विद्यालय में पढ़ाई की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षा संचालन, बच्चों की पढ़ाई और मध्याह्न भोजन व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में ग्रामीण शिक्षकों को विद्यालय से हटाने की मांग भी की गई है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की जांच के बाद ही लिया जा सकता है।
ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे आसपास के परिवारों से आते हैं और उनके भविष्य के लिए सरकारी स्कूल ही मुख्य सहारा है। ऐसे में यदि विद्यालय में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई नहीं होगी तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ेगा।
ग्रामीणों ने बिहार विधानसभा उपाध्यक्ष से मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को जांच के निर्देश देने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि औचक निरीक्षण के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विद्यालय के शिक्षकों और शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि शिकायत के बाद प्रशासन विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था की जांच के लिए क्या कदम उठाता है।




