करौली।* राजस्थान के करौली जिले के हिंडौनसिटी क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां फाजिलाबाद गांव निवासी 55 वर्षीय हरी प्रजापत ने अपनी पत्नी के अश्लील वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करने, मोबाइल फोन के जरिए लगातार धमकियां देने, पीछा करने और जानलेवा हमले की आशंका जताते हुए पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि कुछ लोगों ने उसकी पत्नी से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए और बाद में इन्हीं वीडियो को आधार बनाकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। परिवार का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के कारण उनकी जिंदगी भय और तनाव के बीच गुजर रही है। आरोप है कि जान का खतरा होने के कारण उन्हें अपना घर तक छोड़कर दूसरे शहरों में शरण लेनी पड़ी।
हरी प्रजापत पुत्र कल्लाराम निवासी फाजिलाबाद, मण्डावरा, थाना सदर हिंडौनसिटी के अनुसार, 27 सितंबर 2025 की रात करीब 8 से 9 बजे चार-पांच अज्ञात युवक उनके मकान में घुस आए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने पिस्तौल की नोक पर उन्हें कमरे में बैठा दिया और उनकी पत्नी के साथ अश्लील हरकत करते हुए वीडियो बनाया। पीड़ित का आरोप है कि इस दौरान उन्हें किसी को जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद से ही वह भयभीत रहने लगे और अपनी तथा परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए।
पीड़ित का आरोप है कि बाद में आरोपियों ने कथित तौर पर उनकी पत्नी से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो उनके मोबाइल पर भेजे और अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन तथा संदेश भेजकर धमकियां देना शुरू कर दिया। शिकायत में बताया गया है कि एक मोबाइल नंबर से वीडियो के साथ लिंक भेजा गया था। पीड़ित के अनुसार, लिंक खोलने के बाद उनका मोबाइल फोन हैक हो गया। इसके बाद उन्हें लगातार फोन करके उनकी लोकेशन पूछी जाने लगी। आरोप है कि कुछ लोग पुलिसकर्मी बनकर भी फोन करते थे और उन्हें धमकाते हुए कहते थे कि उनकी पल-पल की लोकेशन पर नजर रखी जा रही है। इन घटनाओं से परेशान होकर हरी प्रजापत दिल्ली, जयपुर, कानोता और अन्य स्थानों पर अपनी जान बचाने के लिए भटकते रहे।
शिकायतकर्ता ने बनवारीलाल पुत्र विशन निवासी पनवेडा, हिंडौनसिटी सहित कुछ मोबाइल नंबर धारकों पर इस पूरे मामले में संलिप्त होने का आरोप लगाया है। प्रार्थना-पत्र में जिन मोबाइल नंबरों का उल्लेख किया गया है, उनमें 9929072550, 7778244504, 8744989141, 9839706596, 8306694140, 9887873971 और 7440077565 शामिल हैं। पीड़ित का आरोप है कि इन नंबरों के माध्यम से व्हाट्सएप, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो प्रसारित किए गए तथा उन्हें लगातार डराया-धमकाया गया। इन नंबरों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच होना आवश्यक है।
हरी प्रजापत का आरोप है कि जब वह जयपुर के कानोता क्षेत्र में रह रहे थे, तब कथित रूप से उनकी लोकेशन ट्रेस कर कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में उनके सिर, हाथ और पैरों में चोटें आने की बात शिकायत में कही गई है। पीड़ित का कहना है कि बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर वह वहां से निकले। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि 16 अप्रैल 2026 को अज्ञात लोगों ने उन पर जानलेवा हमला किया और सिर फोड़कर फरार हो गए। लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह अपने गांव और घर में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
शिकायत में एक मई 2026 की घटना का भी उल्लेख किया गया है। पीड़ित के अनुसार, पुलिसकर्मी रजनलाल द्वारा बुलाए जाने पर वह गांव आए थे। इसी दौरान कथित रूप से कुछ लोगों ने उनका पीछा किया और जान से मारने की धमकी दी। जान बचाने के लिए वह थाना सदर हिंडौनसिटी पहुंचे और अपनी शिकायत प्रस्तुत की, लेकिन उनका आरोप है कि वहां अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित का कहना है कि पत्नी के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकियों के कारण वह और उनकी पत्नी लगातार दहशत में हैं। सार्वजनिक रूप से बदनामी का भय भी उन्हें परेशान कर रहा है।
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मामले से संबंधित ऑडियो, वीडियो और अन्य साक्ष्य पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराए तथा थाना स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। उन्होंने पुलिस अधीक्षक करौली, जिला कलेक्टर करौली और पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर सहित अन्य अधिकारियों को भी शिकायतें भेजने की बात कही है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने 25 अप्रैल 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की थी। इसके बाद दो मई 2026 को भी पुलिस अधीक्षक करौली को प्रार्थना-पत्र भेजकर आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कराने की गुहार लगाई गई।
पीड़ित के अनुसार, पुलिस स्तर पर सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत इस्तगासा पेश कर मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने और जांच कराने की मांग की। इस्तगासे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 तथा आईटी एक्ट की धारा 66 का उल्लेख किया गया है। इसके बाद थाना सदर हिंडौनसिटी में एफआईआर संख्या 262/2026 दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पीड़ित की परेशानी कम नहीं हुई। अब हरी प्रजापत ने पुलिस अधीक्षक करौली को नया प्रार्थना-पत्र देकर एफआईआर संख्या 262/2026 की जांच किसी अन्य योग्य और निष्पक्ष अनुसंधान अधिकारी से कराने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से साइबर थाना करौली से भी मामले की जांच करवाने का अनुरोध किया है, ताकि सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने, मोबाइल नंबरों के इस्तेमाल, कथित धमकियों, मोबाइल हैकिंग और लोकेशन ट्रेस किए जाने जैसे पहलुओं की तकनीकी जांच हो सके।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब वह अपने बयान दर्ज कराने थाना सदर हिंडौनसिटी पहुंचे तो अनुसंधान अधिकारी ने कथित रूप से आरोपियों को फोन करके थाने बुला लिया। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों के सामने ही उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए डांटा-फटकारा गया और कथित तौर पर कहा गया कि सो कर लेना, तुम्हारे प्रकरण में हम एफआर देंगे। पीड़ित के अनुसार, इस व्यवहार के बाद उनका संबंधित अनुसंधान अधिकारी से विश्वास उठ गया है। उन्हें आशंका है कि यदि मामले की जांच उसी अधिकारी के पास रही तो उन्हें निष्पक्ष न्याय नहीं मिल पाएगा। इसी कारण उन्होंने जांच अधिकारी बदलने और साइबर थाना करौली से तकनीकी अनुसंधान कराने की मांग की है।
हरी प्रजापत का कहना है कि उनकी उम्र करीब 55 वर्ष है और इस पूरे मामले ने उनके परिवार को मानसिक तथा सामाजिक रूप से परेशान कर दिया है। पत्नी से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री वायरल होने की कथित धमकियों और लगातार जान से मारने की चेतावनियों के कारण परिवार सामान्य जीवन नहीं जी पा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें अपना घर छोड़कर अलग-अलग शहरों में छिपकर रहना पड़ा। अब वह चाहते हैं कि पुलिस प्रशासन उनकी शिकायत को गंभीरता से लेकर मामले की निष्पक्ष जांच कराए, ताकि आरोपियों की वास्तविक भूमिका सामने आ सके और परिवार को सुरक्षा मिल सके।
परिवार ने पुलिस अधीक्षक करौली से मांग की है कि एफआईआर संख्या 262/2026 की जांच किसी निष्पक्ष एवं अनुभवी अधिकारी को सौंपी जाए। साथ ही साइबर थाना करौली की मदद से संबंधित मोबाइल नंबरों, सोशल मीडिया अकाउंट, वीडियो के प्रसारण, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। परिवार का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। लंबे समय से डर और परेशानी में जी रहे परिवार को समय रहते न्याय और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। आरोपित पक्ष और संबंधित अनुसंधान अधिकारी का आधिकारिक पक्ष भी सामने नहीं आया है। मामले में पुलिस की जांच और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक पड़ताल के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना यह होगा कि पुलिस अधीक्षक करौली इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच तथा सुरक्षा का भरोसा कब तक मिल पाता है।




