Friday, June 19, 2026
spot_img

Latest Posts

मधेपुरा में पारंपरिक खेती छोड़ मखाना उगाने में जुटे किसान, प्रति एकड़ 30 से 40 हजार रुपये तक का हो रहा मुनाफा

मधेपुरा जिले के बिहारीगंज में मखाना की खेती का रकवा दिनों- दिन तेजी से बढ़ रहा है। इसकी खेती से किसानों की उन्नति हो रही है। सात वर्ष पूर्व इस इलाके में मखाना की नहीं होती थी। 

सीमावर्ती पूर्णिया जिले के कुछ किसानों ने निचला भूमि लीज पर लेकर मखाना खेती की शुरुआत की थी। इसकी खेती से अच्छा मुनाफा होने पर मखाना खेती का रकवा बढ़ने लगा। 

2021 में 25 एकड़ में खेती

वर्ष 2021 में मात्र 25 एकड़ में मखाना खेती की गई थी। इसकी खेती से होने वाले मुनाफा से किसानों के चेहरे खिल उठे थे। यही वजह है कि आज सैकड़ों हेक्टेयर में मखाना की खेती हो रही है।

किसानों को मखाना की बेहतर पैदावार होने की उम्मीद है। इस इलाके में मखाना खेती करने वाले किसान फसल देखकर खुश नजर आ रहे है। पूर्व वर्ष की भांति बारिश कम होने की वजह से पंप सेट का सहारा लिया जा रहा है। 

पानी एकत्र कर मखाना की खेती 

किसानों का कहना हैं कि खेतों में ही मेड़ बनाकर व पानी एकत्र कर मखाना की खेती कर रहे हैं। जबकि इसकी खेती के लिए पानी की आवश्यकता होती है। गर्मी के मौसम में खेतों में पानी संग्रहित करने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती हैं।

वहीं, पानी संग्रहित करने में मेहनत के साथ अत्यधिक खर्च भी उठाना पड़ता है। पानी के अभाव में मखाना की फसल बर्बाद होने की संभावना बनी रहती है। इसलिए पानी संग्रहित करनें के पंप सेट की वैकल्पिक व्यवस्था करतें हैं। इसकी खेती में कम लागत में अच्छी आय होंने से किसानों का रूझान तेजी से बढ़ रहा है। यहीं वजह हैं कि पारंपरिक खेती छोड़कर किसानों बदलते परिवेश में मखाना खेती से जुट रहे हैं।

कटिहार व पूर्णिया जिले के आते हैं मजदूर 

बिहारीगंज प्रखंड क्षेत्र के सभी पंचायत में मखाना खेती की जा रही है। इसकी अधिकांश खेती पड़ोसी जिलें कटिहार व पूर्णिया जिले के किसान प्रति एकड़ 10- 15 हजार रुपये प्रति वर्ष लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं। 

किसान रामजी पंडित, सुरेन्द्र झा, राजकुमार सहनी, नागो ॠषिदेव, शंभू सिंह, शंकर सिंह, शैलेंद्र सिंह, बह्मदेव मंडल, शीबू मंडल, झरीलाल पंडित व अन्य ने बताया कि निचली भूमि में पानी लगने के कारण अन्य फसल नहीं हो पाने की वजह से खेत खाली रह जाती थी। इसकी खेती कर 30- 40 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुनाफा हो जाता है। 

इस इलाके में मखाना बीज निकालने में मजदूरों की परेशानी होती है। इसके लिए पूर्णिया, कटिहार व दरभंगा जिले से मजदूरों को लाना पड़ता है। जिससे खर्च का बोझ बढ़ता है। अब इलाके के मजदूरों को भी मखाना बीच पानी से निकालने की सीख दी जा रहीं हैं। 

आज प्रदेश के पूर्णिया,दरभंगा, मधुबनी जिले में उन्नत किस्म के मखाने की खेती बड़े पैमाने पर होने की वजह से इस जिले के मखाने को जीआई टैग मिल चुका हैं। इस इलाके के किसानों को कृषि विभाग से सहयोग की आवश्यकता है। इस इलाके में थ्रेसिंग मशीन, वाशिंग ड्रम, हार्वेस्टिंग ड्रम, हलरिंग मशीन व अन्य उपकरण के आभाव में पूर्णिया ले जाना पड़ता हैं।

कमल फूल के आकार के होते मखाना के फूल 

मखाना में अप्रैल माह में फूल लगना शुरू हो जाता है। फूल का आकार कमल फूल की तरह होता है। फूल के बाद कांटेदार स्पंजी फल लगते हैं, जिनमें बीज होते हैं। यह फल और बीज दोनों ही खाने योग्य होते हैं। इनमें आठ से बीस काले रंग के बीज निकलते हैं। जून-जुलाई के महीने में फल काटना शुरू कर दिया जाता है।

Latest Posts

spot_imgspot_img

Don't Miss

Stay in touch

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.