भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव बढ़ता नजर आया। सेंसेक्स करीब 450 अंक टूटकर 72,618 के स्तर पर, जबकि निफ्टी 161 अंक गिरकर 22,615 के आसपास पहुंच गया।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के रेपो रेट पर आने वाले फैसले से ठीक पहले घरेलू शेयर बाजार में घबराहट का माहौल देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई।शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 22,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे खिसककर 22,614 पर आ गया। बाजार पर ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हैवीवेट शेयरों में बिकवाली का गहरा असर दिखा।
सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआती चाल
कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही बिकवाली का दबाव हावी रहा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 449.50 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की तेज गिरावट के साथ 72,618.31 के स्तर पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 161.40 अंक यानी 0.71 प्रतिशत टूटकर 22,614.70 पर कारोबार करता दिखा। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण एडवांस्ड-डिक्लाइन रेशियो भी नकारात्मक रहा। शुरुआती सत्र में लगभग 971 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 1,379 शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में दिखे और 181 शेयरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
फार्मा और टेलीकॉम में खरीदारी, बाकी बाजार पस्त
गिरावट के इस माहौल में भी फार्मा और टेलीकॉम सेक्टर के चुनिंदा शेयरों ने बाजार को थामने का प्रयास किया। डॉ. रेड्डीज लैब्स 0.99% की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा। इसके अलावा सिप्ला (+0.63%), भारती एयरटेल (+0.61%), कोल इंडिया (+0.29%) और टेक महिंद्रा (+0.06%) में हल्की खरीदारी दर्ज की गई। दूसरी तरफ कंज्यूमर और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली हुई। टाइटन कंपनी 3.39% की भारी गिरावट के साथ सबसे बड़ा लूजर बना। इसके अलावा एसबीआई लाइफ (-2.06%), एशियन पेंट्स (-1.59%), हिंडाल्को (-1.56%), श्रीराम फाइनेंस (-1.51%), महिंद्रा एंड महिंद्रा (-1.48%), मारुति (-1.40%) और इंडिगो (-1.37%) में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
क्यों बढ़ा बाजार में दबाव?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई द्वारा ब्याज दरों पर घोषणा किए जाने से पहले निवेशक जोखिम उठाने से बच रहे हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी सुस्ती और क्रूड ऑयल की कीमतों के रुख ने भी भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ाने का काम किया है।




