Wednesday, October 14, 2026
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‘हनुमान अंश’ की तरह छाई 2.5 करोड़ में बनी ‘प्रेमदा ऊराली’, 18 दिन में कमाए 51 करोड़, मां का मंगलसूत्र गिरवी रखने वाले थे डायरेक्टर

कन्नड़ फिल्म ‘प्रेमदा ऊराली’ ने महज 2.5 करोड़ रुपये के बजट में 18 दिनों में 51.65 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया। निर्देशक मनोज कुमार की संघर्षभरी कहानी और अनोखे प्रमोशन ने सबका ध्यान खींचा।
बॉक्स ऑफिस पर सफलता के लिए हमेशा बड़े बजट, सुपरस्टार और करोड़ों रुपये के प्रमोशन की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक अच्छी कहानी और फिल्म बनाने का जुनून भी कमाल कर सकता है। कन्नड़ फिल्म ‘प्रेमदा ऊराली’ इसकी ताजा मिसाल बनकर सामने आई है। कथित तौर पर महज 2.5 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है। सैक्निल्क के आंकड़ों के मुताबिक रिलीज के 18 दिनों के भीतर फिल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन 51.65 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। फिल्म की शुरुआत भले ही धीमी रही, लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों के बीच इसकी चर्चा बढ़ी और कमाई में जबरदस्त उछाल आया। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के निर्देशक मनोज कुमार को रिलीज से पहले इसके दर्शकों तक पहुंचने की चिंता सता रही थी। हालात ऐसे थे कि फिल्म को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी मां का मंगलसूत्र तक गिरवी रखने के बारे में सोचना पड़ा था।
2.5 करोड़ का बजट, बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों की कमाई
मनोज कुमार के निर्देशन में बनी ‘प्रेमदा ऊराली’ ने शुरुआती दिनों में बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं किया था। फिल्म की शुरुआत करीब 60 शो में लगभग 9 लाख रुपये की कमाई से हुई। हालांकि, दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ने के साथ इसके शो और कलेक्शन दोनों में इजाफा होने लगा। 15वें दिन फिल्म ने 1,178 शो के जरिए लगभग 4.5 करोड़ रुपये कमाए। इस दौरान इसकी ऑक्यूपेंसी करीब 57 प्रतिशत रही। Sacnilk के मुताबिक, 18 दिनों में फिल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन 51.65 करोड़ रुपये हो गया। महज 2.5 करोड़ रुपये के कथित बजट के मुकाबले यह कमाई फिल्म की शानदार बॉक्स ऑफिस सफलता को दिखाती है।

शादी के कार्ड बांटकर किया फिल्म का प्रमोशन
‘प्रेमदा ऊराली’ की सफलता के पीछे फिल्म की टीम की मेहनत और अनोखी प्रचार रणनीति की भी चर्चा हो रही है। रिलीज से ठीक एक दिन पहले निर्देशक मनोज कुमार को आशंका थी कि शायद उनकी फिल्म को पर्याप्त दर्शक नहीं मिलेंगे। सीमित बजट के कारण बड़े स्तर पर प्रमोशन करना भी आसान नहीं था। ऐसे में टीम ने एक अलग तरीका अपनाया। उन्होंने शादी के निमंत्रण पत्र जैसे दिखने वाले कार्ड छपवाए और बसों में सफर करते हुए अजनबियों के बीच बांटे। इन कार्ड्स के जरिए लोगों से फिल्म देखने और उसे एक मौका देने की अपील की गई। छोटी-सी लगने वाली इस पहल ने फिल्म की ओर लोगों का ध्यान खींचने में मदद की। धीरे-धीरे फिल्म को दर्शक मिलने लगे और इसकी कमाई में बढ़ोतरी होने लगी।

फिल्म बनाने के लिए मां का मंगलसूत्र गिरवी रखने की नौबत
फिल्म की सफलता के पीछे संघर्ष की कहानी भी सामने आई है। फिल्म के निर्माण के दौरान आर्थिक परेशानियों ने मेकर्स की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए पैसों की व्यवस्था करना चुनौती बन गया था। हालात ऐसे हो गए थे कि निर्देशक मनोज कुमार अपनी मां का मंगलसूत्र गिरवी रखने के बारे में सोच रहे थे। ऐसे में फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर सफल होना उनके लिए बड़ी राहत की तरह देखा जा रहा है। हालांकि, फिल्म की सफलता के बाद भी इसके कुल मुनाफे का सटीक आंकड़ा केवल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें वितरण, प्रचार और अन्य खर्च भी शामिल होते हैं।

कम बजट की फिल्मों के लिए बनी मिसाल
‘प्रेमदा ऊराली’ की सफलता ऐसे समय में आई है, जब बड़े बजट की फिल्मों को अपनी लागत निकालने के लिए भारी कमाई करनी पड़ती है। वहीं कम बजट में बनी फिल्में भी दर्शकों की पसंद बनकर अच्छा कारोबार कर सकती हैं। ‘हनुमान अंश’ और ‘लालो’ जैसी फिल्मों की सफलता भी इस बात की याद दिलाती है कि दर्शकों तक पहुंचने के लिए सिर्फ बड़े सितारे या महंगा प्रचार ही जरूरी नहीं है। ‘टॉक्सिक’ जैसी फिल्मों के कथित 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट की तुलना में ‘प्रेमदा ऊराली’ का सफर अलग तस्वीर पेश करता है। फिल्म की बढ़ती कमाई ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही रणनीति, मेहनत और दर्शकों की दिलचस्पी किसी छोटे प्रोजेक्ट को बड़ी सफलता दिला सकती है।

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