Thursday, August 27, 2026
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भरतपुर में बेटे की मौत के बाद परिवार का आरोप: एक महीने से थाने के चक्कर, पुलिस पर FIR दर्ज नहीं करने का आरोप

भरतपुर। भरतपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों का आरोप है कि युवक राम की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि साजिश के तहत उसकी हत्या की गई। परिवार का कहना है कि घटना के बाद अस्पताल और पुलिस को सूचना देने के बावजूद उनकी शिकायत पर समय से कार्रवाई नहीं की गई। अब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस और न्यायालय के चक्कर लगाने को मजबूर है।

परिवार के अनुसार, घटना 6 और 7 अप्रैल 2025 की दरमियानी रात की है। परिजनों का कहना है कि रात में उन्हें चीखने की आवाजें सुनाई दीं। इसके बाद परिवार के लोग मौके पर पहुंचे तो राम गंभीर हालत में मिला। उसके भाई अवतार ने तत्काल एंबुलेंस बुलवाई और राम को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि सुबह अस्पताल से पुलिस को सूचना दी गई थी। पुलिस की ओर से कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन परिवार के मुताबिक इसके बाद भी उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। परिवार का दावा है कि उन्होंने कोतवाली थाने के कई चक्कर लगाए, लेकिन कथित तौर पर उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

मृतक के परिवार ने एक महिला ऋतु सहित रोहित, मनीष और एक अन्य व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि मृतक को पहले भी जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। परिवार का आरोप है कि राम ने महिला के अन्य पुरुषों के साथ कथित संबंधों के बारे में जानकारी होने की बात कही थी, जिसके बाद विवाद बढ़ गया था। परिवार का यह भी आरोप है कि महिला कथित तौर पर रोहित और मनीष को बुलाकर राम और परिवार के सदस्यों को धमकाती थी।

परिवार के मुताबिक, राम की मौत के बाद उसके बेटे से पूछताछ करने पर उसने तीन लोगों द्वारा साजिश के तहत हत्या किए जाने की आशंका जताई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद रोहित और मनीष ने कार्रवाई करने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और इसके बावजूद पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, बेटे के अंतिम संस्कार में व्यस्त होने के कारण वह तत्काल पुलिस कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास नहीं कर सका। बाद में 20 अप्रैल 2025 को जब वह कोतवाली थाने पहुंचा तो कथित तौर पर उसे पता चला कि उसकी शिकायत दर्ज ही नहीं हुई है। परिवार का आरोप है कि थाने में रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार किए जाने के बाद 21 अप्रैल 2025 को पुलिस अधीक्षक, भरतपुर को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से लिखित शिकायत भेजी गई, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप है।

मामला इसके बाद न्यायालय तक पहुंचा। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत इस्तगासा में आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 238(4), 351(2), 331(4) और 61(2) के तहत कार्रवाई की मांग की गई। दस्तावेज में धारा 175(3) BNSS के तहत मामले की जांच के लिए पुलिस थाना कोतवाली, भरतपुर भेजे जाने का उल्लेख है।

दस्तावेज के अनुसार 5 मई 2025 को कोतवाली भरतपुर पुलिस की ओर से न्यायालय से प्राप्त इस्तगासा के आधार पर मामला दर्ज कर FIR की कार्रवाई की गई। मामले में जांच अधिकारी के रूप में विनोद कुमार मीणा का नाम दर्ज है। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि FIR को CCTNS में दर्ज करने के बाद नियमानुसार प्रतियां तैयार की जाएंगी।

पीड़ित परिवार का कहना है कि बेटे की मौत के बाद से वे न्याय की उम्मीद में लगातार अधिकारियों और पुलिस के दरवाजे खटखटा रहे हैं। परिवार की सबसे बड़ी मांग है कि राम की मौत की निष्पक्ष जांच हो, कथित धमकियों और साजिश की जांच की जाए तथा जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उनकी भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि परिवार ने घटना से पहले धमकियां मिलने का दावा किया है और मौत के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए लगातार प्रयास करने की बात कही है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस जांच में मौत के वास्तविक कारण, घटनास्थल की परिस्थितियों और आरोपित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें अब भी पूरी तरह न्याय नहीं मिला है और वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए। परिवार ने संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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