बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सहतवार थाना क्षेत्र के ग्राम सुरहिया निवासी ललिता देवी, पत्नी रामनाथ वर्मा, ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और विकलांग पति के सहारे जीवन गुजार रही ललिता देवी का आरोप है कि वह अपनी पुश्तैनी जमीन पर दरवाजा तक नहीं लगा पा रही हैं। पड़ोसियों के विरोध और प्रशासनिक उदासीनता के कारण उनका परिवार लंबे समय से परेशानी झेल रहा है।
पीड़िता का कहना है कि उनका कच्चा पुश्तैनी मकान बारिश में गिर गया था। इसके बाद उन्होंने उसी स्थान पर नया दरवाजा लगाने का प्रयास किया, लेकिन पड़ोसी अवधेश कुमार, मारू पुत्र बनारसी ठाकुर और कानगोई पुत्र पारस ठाकुर ने कथित रूप से इसका विरोध किया। आरोप है कि विरोध के दौरान गाली-गलौज, धमकी और मारपीट की कोशिश भी की गई, जिससे परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।
ललिता देवी का कहना है कि उन्होंने मामले की शिकायत स्थानीय थाना, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी की। उनका आरोप है कि शिकायत के निस्तारण के नाम पर उनसे ओटीपी लेकर मामला बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि जांच रिपोर्ट में किसी दूसरे व्यक्ति के मकान और दरवाजे की तस्वीर लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया, जबकि उनके घर का सही निरीक्षण तक नहीं किया गया।
महिला का आरोप है कि पुलिस की जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि वह अब किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं चाहती हैं, जबकि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। उनका कहना है कि आज भी वह अपनी पुश्तैनी जमीन पर दरवाजा नहीं लगा पा रही हैं और पड़ोसियों द्वारा नाबदान का पानी निकालने का रास्ता भी बंद कर दिया गया है, जिससे पूरे परिवार का जीवन संकट में पड़ गया है।
पीड़िता ने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित गलत जांच रिपोर्ट की समीक्षा कराने, पुश्तैनी जमीन पर दरवाजा लगवाने, नाबदान का रास्ता खुलवाने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कई शिकायतों के बावजूद कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है और अब उन्हें न्याय की अंतिम उम्मीद शासन-प्रशासन से ही है।
हालांकि, पुलिस की उपलब्ध रिपोर्ट में उल्लेख है कि जांच के दौरान आवेदिका द्वारा आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहने की बात कही गई थी और अतिरिक्त पुलिस कार्रवाई आवश्यक नहीं पाई गई। वहीं, ललिता देवी इस निष्कर्ष से असहमति जताते हुए इसे गलत बता रही हैं। मामले की वास्तविक स्थिति सक्षम अधिकारियों की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




