Wednesday, July 29, 2026
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सीमा रक्षा पर देश की, गांव में इंसाफ की जंग! सेना के जवान का परिवार वर्षों से न्याय की राह देखता रहा, जमीन विवाद में गुमराह करने का आरोप

सहरसा। बिहार के सहरसा जिले से सामने आया एक भूमि विवाद अब केवल जमीन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया और एक सैनिक के परिवार की लंबी कानूनी लड़ाई का विषय बन गया है। भारतीय सेना में कार्यरत जवान सिद्धार्थ सौरव और उनके परिवार का आरोप है कि देश की सेवा के दौरान उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उनकी विधिवत खरीदी गई जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया गया। परिवार का कहना है कि वर्षों से वे न्याय की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें उनकी भूमि पर वैधानिक अधिकार नहीं मिल सका।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने संबंधित थाना, अंचल कार्यालय और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार आवेदन देकर पूरे मामले की शिकायत की। उनका कहना है कि जमीन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही कथित अतिक्रमण हटाया गया। परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार अलग-अलग प्रक्रियाओं में उलझाकर गुमराह किया गया, जिससे न्याय मिलने में लगातार देरी होती रही।

परिवार के अनुसार, मामला सलखुआ अंचल के चिरैया थाना क्षेत्र के डेंगराहि गांव की भूमि से जुड़ा है। आरोप है कि जवान की ड्यूटी के दौरान कुछ लोगों ने विवादित भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्राथमिकी दर्ज करने, अतिक्रमण हटाने और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें लोक शिकायत निवारण प्रणाली का सहारा लेना पड़ा।

मामला अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, सिमरी बख्तियारपुर के समक्ष भी पहुंचा। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर पुलिस और अंचल कार्यालय से रिपोर्ट तलब की गई। पुलिस की रिपोर्ट में दोनों पक्षों के बीच वर्षों से दखल-कब्जे को लेकर विवाद होने का उल्लेख किया गया, जबकि दूसरे पक्ष ने भी अपने पक्ष में पुराने लेन-देन का दावा किया। वहीं राजस्व विभाग की रिपोर्ट में भी इसे दखल-कब्जे से जुड़ा विवाद बताते हुए जनता दरबार में दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने की बात कही गई।

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने उपलब्ध प्रतिवेदनों के आधार पर शिकायत की कार्यवाही समाप्त करते हुए परिवादी को शनिवार जनता दरबार में अपना पक्ष रखने की सलाह दी। हालांकि सेना के जवान का परिवार इस निर्णय से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन और प्रक्रिया ही मिली, जबकि जमीन पर उनका वैधानिक अधिकार आज भी सुनिश्चित नहीं हो सका। परिवार का आरोप है कि लगातार विलंब के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पीड़ित परिवार ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो तत्काल अतिक्रमण हटाकर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें उनकी खरीदी गई संपत्ति पर वैधानिक अधिकार मिल सके।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे प्रस्तुत किए हैं। भूमि के स्वामित्व, कब्जे और अधिकार से संबंधित अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय अथवा संबंधित राजस्व एवं प्रशासनिक प्राधिकरण की जांच एवं आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

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