Friday, October 16, 2026
spot_img

Latest Posts

आपसी रंजिश के चलते चुनाव लड़ने से रोकने का आरोप, रैणी पंचायत समिति के वार्ड 26 से जुबेर खान का नामांकन खारिज; कार्रवाई पर उठाए सवाल

अलवर/रैणी। राजस्थान में पंचायत समिति सदस्य के आम चुनाव 2026 के बीच रैणी पंचायत समिति के वार्ड संख्या 26 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे जुबेर खान का नामांकन पत्र निरस्त किए जाने का मामला सामने आया है। जुबेर खान ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ आपसी रंजिश के चलते गलत आरोप लगाए गए हैं और इसी विवाद के कारण उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर होना पड़ा है। उनका कहना है कि वह चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, पार्टी से टिकट भी प्राप्त कर लिया था, लेकिन नामांकन खारिज होने से उनकी चुनावी उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नामांकन निरस्त करने के आधार की स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।

जुबेर खान के अनुसार, उन्होंने रैणी पंचायत समिति के वार्ड संख्या 26 से सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। चुनाव की तैयारी के दौरान उन्होंने कानूनी पहलुओं को लेकर वकील से भी सलाह ली थी। उनका दावा है कि उन्हें बताया गया था कि वह चुनाव लड़ सकते हैं और इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने आगे की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद उन्हें पार्टी से टिकट भी मिल गया। लेकिन नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। जुबेर खान का कहना है कि इस निर्णय से वह हैरान हैं और अब जानना चाहते हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में उनका नामांकन खारिज किया गया।

जुबेर खान ने आरोप लगाया कि उनके और कुछ लोगों के बीच आपसी रंजिश चल रही है। उनका दावा है कि इसी व्यक्तिगत विवाद के चलते उनके खिलाफ आरोप लगाए गए और अब उन आरोपों से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही का हवाला देकर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया। उनका कहना है कि यदि उनके खिलाफ कोई मामला चल रहा है, तो उसकी वास्तविक परिस्थितियों और तथ्यों को निष्पक्ष रूप से देखा जाना चाहिए। हालांकि, आपसी रंजिश के कारण आरोप लगाए जाने की बात फिलहाल जुबेर खान का आरोप है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब भी सामने आना बाकी है।

रिटर्निंग अधिकारी कार्यालय से संबंधित उपलब्ध दस्तावेज में वार्ड संख्या 26 के अभ्यर्थी जुबेर हनीफ के नामांकन पत्र अस्वीकार किए जाने का उल्लेख है। दस्तावेज में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2) तथा अन्य धाराओं के अंतर्गत न्यायालय में आरोप विरचित किए जाने का हवाला देते हुए राजस्थान पंचायत निर्वाचन नियमों के नियम 19 के तहत नामांकन अस्वीकार करने की बात लिखी गई है। उपलब्ध प्रति में एक से अधिक प्रविष्टियों में जुबेर हनीफ का नाम दर्ज है, जबकि कुछ धाराओं और नियमों का विवरण अस्पष्ट है। इसलिए संबंधित आदेश की प्रमाणित प्रति से सटीक कानूनी आधार की पुष्टि किया जाना आवश्यक है।

जुबेर खान का कहना है कि उन्होंने चुनाव लड़ने से पहले वकील से सलाह ली थी और उन्हें उम्मीद थी कि वह नियमानुसार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। पार्टी से टिकट मिलने के बाद उन्होंने वार्ड 26 से चुनाव लड़ने की तैयारी की, लेकिन नामांकन निरस्त होने से उनकी योजना प्रभावित हो गई। उनका आरोप है कि उन्हें नामांकन खारिज करने के निर्णय का स्पष्ट आधार और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। वह चाहते हैं कि उन्हें बताया जाए कि किस कानूनी प्रावधान के तहत उनका नामांकन अस्वीकार किया गया और उनके मामले में कौन-से तथ्य आधार बनाए गए।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या संबंधित निर्वाचन नियमों के तहत जुबेर खान के विरुद्ध लंबित न्यायिक मामले और न्यायालय में आरोप विरचित होने की स्थिति नामांकन अस्वीकार करने के लिए पर्याप्त आधार बनती है। केवल आरोप लगाए जाने और न्यायालय द्वारा आरोप तय किए जाने की कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है। चुनाव लड़ने की पात्रता पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, यह संबंधित नियमों, लागू कानूनी प्रावधानों और मामले के वास्तविक तथ्यों पर निर्भर करेगा। इसलिए नामांकन निरस्त करने के आदेश की प्रमाणित प्रति और संबंधित न्यायालय के रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण है।

जुबेर खान ने संबंधित अधिकारियों से नामांकन निरस्त किए जाने के निर्णय की समीक्षा करने, आपसी रंजिश के कारण गलत आरोप लगाए जाने के उनके दावे की जांच कराने और उन्हें निर्णय का स्पष्ट आधार उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नामांकन निरस्त करने की प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई है, तो नियमानुसार उसका समाधान किया जाना चाहिए। वह चाहते हैं कि उन्हें अपना पक्ष रखने और उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करने का उचित अवसर मिले।

फिलहाल, इस मामले में रिटर्निंग अधिकारी का विस्तृत आधिकारिक पक्ष और नामांकन निरस्त करने के आदेश की प्रमाणित प्रति सामने आना बाकी है। उपलब्ध दस्तावेज में न्यायालय में आरोप विरचित किए जाने को नामांकन अस्वीकार करने का आधार बताया गया है, जबकि जुबेर खान इसे आपसी रंजिश से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए निर्वाचन नियमों, न्यायालयी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारी के आदेश की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

Latest Posts

spot_imgspot_img

Don't Miss

Stay in touch

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.