हरदा, मध्य प्रदेश।कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहा हरदा जिले की खिरकिया तहसील के ग्राम दामोदरपुरा में कृषि भूमि से रास्ता निकालने को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। अपनी पुश्तैनी जमीन को लेकर परेशान किसान ओमप्रकाश ने कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के माध्यम से शिकायत प्रस्तुत कर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आवेदक का आरोप है कि उसकी निजी कृषि भूमि से रास्ता निकालने के मामले में राजस्व अधिकारियों द्वारा उचित जांच किए बिना कार्रवाई की जा रही है। उसने पटवारी और तहसीलदार पर रिश्वत लेकर मामले को विवादित बनाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
आवेदक ओमप्रकाश, पिता बद्री प्रसाद, निवासी ग्राम दामोदरपुरा, तहसील खिरकिया, जिला हरदा के अनुसार, मौजा दामोदरपुरा स्थित खसरा नंबर 11/1 की लगभग 3.80 एकड़ कृषि भूमि उसके नाम पर दर्ज है। ओमप्रकाश का कहना है कि यह भूमि उसकी पुश्तैनी संपत्ति है और वह इस पर खेती करके अपने परिवार का भरण-पोषण करना चाहता है। उसके मुताबिक, पहले आपसी व्यवहार और संबंधों के चलते उसने संतोष कुमार को अपनी भूमि से निकलने की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में जमीन के दूसरे व्यक्ति को बेचे जाने के बाद रास्ते को लेकर विवाद शुरू हो गया।
ओमप्रकाश का आरोप है कि संतोष कुमार और अन्य लोगों की ओर से उसकी जमीन से रास्ता निकालने के लिए बार-बार राजस्व न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किए जा रहे हैं। आवेदक का कहना है कि संबंधित पक्ष उसकी निजी भूमि से रास्ता मांग रहा है, जबकि उसके अनुसार वहां से निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ते की स्थिति और उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच किया जाना आवश्यक है। उसने यह भी आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान उसे धमकियां दिए जाने की आशंका है, जिससे वह अपनी जमीन और खेती को लेकर चिंतित है।
*नायब तहसीलदार के आदेश के बाद रास्ता खुलवाने की प्रक्रिया*
मामले में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, न्यायालय नायब तहसीलदार खिरकिया की ओर से 5 अक्टूबर 2026 को राजस्व प्रकरण से संबंधित आदेश जारी किया गया। इसके पालन के लिए राजस्व निरीक्षक चारुवा और हल्का पटवारी दामोदरपुरा को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। दस्तावेजों में ग्राम दामोदरपुरा निवासी संतोष कुमार, पिता भैरूलाल, तथा अन्य पांच लोगों के आवेदन का उल्लेख है। साथ ही, रास्ता खुलवाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की आवश्यकता होने पर थाना प्रभारी छीपाबड़ को आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजे जाने का उल्लेख भी मिलता है।
इस आदेश और पत्राचार के बाद ओमप्रकाश की चिंता बढ़ गई है। उसका कहना है कि यदि उसकी कृषि भूमि से रास्ता निकालने की कार्रवाई की जाती है, तो उसकी खेती प्रभावित हो सकती है। वह चाहता है कि मौके की वास्तविक स्थिति, जमीन की सीमाओं, राजस्व रिकॉर्ड और पहले से मौजूद सरकारी रास्तों की जांच कराई जाए। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि विवादित रास्ता वास्तव में सरकारी रास्ता है या निजी भूमि से संबंधित रास्ते का मामला है। इस बिंदु पर राजस्व अभिलेखों और स्थल निरीक्षण के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
*सरकारी रास्ता दूसरी जगह होने का दावा, रिकॉर्ड की जांच की मांग*
ओमप्रकाश ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि संबंधित क्षेत्र में सरकारी रास्ते की स्थिति अलग है, लेकिन इसके बावजूद उसकी जमीन से रास्ता निकालने को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। उसने आरोप लगाया कि पटवारी और तहसीलदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा यह पता लगाया जाना चाहिए कि राजस्व रिकॉर्ड में रास्ते की वास्तविक स्थिति क्या दर्ज है। आवेदक के अनुसार, यदि अभिलेखों में सरकारी रास्ता किसी अन्य स्थान पर दर्ज है, तो उस रिकॉर्ड को नजरअंदाज करके उसकी निजी जमीन पर रास्ते का विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उसने मामले में रिश्वतखोरी की आशंका जताते हुए उच्च अधिकारियों से जांच की मांग की है। हालांकि, रिश्वत लेने के संबंध में कोई स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए इस आरोप की पुष्टि जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही हो सकती है।
*कलेक्टर और एसडीएम से निष्पक्ष जांच की गुहार*
ओमप्रकाश ने कलेक्टर हरदा और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष शिकायत देकर पूरे मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन कराने की मांग की है। उसने अनुरोध किया है कि राजस्व प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए जाएं, जमीन की सीमाओं और रास्ते की स्थिति का नियमानुसार परीक्षण कराया जाए तथा जांच पूरी होने तक उसके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती न हो। आवेदक चाहता है कि यदि उसके विरुद्ध प्रस्तुत आवेदन तथ्यहीन पाए जाते हैं, तो नियमानुसार उन पर उचित निर्णय लिया जाए।
ओमप्रकाश का कहना है कि वह अपनी कृषि भूमि को उपजाऊ बनाकर फसल बोना और परिवार का भरण-पोषण करना चाहता है। ऐसे में भूमि से संबंधित विवाद का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान उसके लिए बेहद जरूरी है। उसने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि खसरा नंबर 11/1 की भूमि से संबंधित वास्तविक रास्ता किस स्थान पर दर्ज है और नायब तहसीलदार के आदेश का आधार क्या है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच, राजस्व अभिलेखों का परीक्षण और मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन होने के बाद ही विवाद की तस्वीर साफ हो सकेगी। फिलहाल, आवेदक ने प्रशासन से न्याय और अपनी जमीन पर खेती करने के अधिकार की सुरक्षा की मांग की है।




