भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के आयर थाना क्षेत्र में पैतृक जमीन पर कथित रूप से जबरन सड़क निर्माण कराने का मामला सामने आया है। पीड़ित अनिल कुमार सिंह ने स्थानीय मुखिया सहित कई लोगों पर उनकी खानदानी जमीन में बिना मापी कराए जबरन सड़क बनाने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को मारपीट तथा जान से मारने की धमकी दी जा रही है। बावजूद इसके अब तक उन्हें प्रशासन से कोई राहत नहीं मिली है।
पीड़ित अनिल कुमार सिंह, पिता स्वर्गीय श्याम सुंदर सिंह, ग्राम आयर, थाना आयर, जिला भोजपुर के निवासी हैं। उन्होंने थाना प्रभारी को दिए आवेदन में बताया है कि मौजा आयर, थाना संख्या-290, अंचल जगदीशपुर के अंतर्गत खाता संख्या-363 एवं खेसरा संख्या-7041 की उनकी पैतृक भूमि पर कथित रूप से स्थानीय मुखिया डब्ल्यू सिंह, दिनेश सिंह, प्रवीण कुमार सिंह एवं राजकुमारी देवी द्वारा बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के सड़क निर्माण कराया जा रहा है।
आवेदन के अनुसार, संबंधित लोग उनकी जमीन के उत्तरी हिस्से में लगभग 50 फीट लंबाई और करीब 5 फीट चौड़ाई में निर्माण कार्य कर रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो नामजद लोगों ने मारपीट करने और खून-खराबा करने की धमकी दी। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य नहीं रोका गया तो उनकी पैतृक जमीन पर स्थायी सड़क बना दी जाएगी, जिससे उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।
अनिल कुमार सिंह का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि की सरकारी मापी नहीं कराई गई और न ही सीमांकन कराया गया। उनका कहना है कि बिना राजस्व विभाग की मापी और प्रशासनिक अनुमति के सड़क निर्माण पूरी तरह अवैध है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पहले जमीन की विधिवत मापी कराकर वास्तविक सीमा का निर्धारण कराया जाए, उसके बाद ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य कराया जाए।
पीड़ित का यह भी कहना है कि उन्होंने स्थानीय थाना और संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन अब तक कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हुई। इससे पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने तथा निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की है।
समाचार लिखे जाने तक आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं पुलिस या प्रशासन की ओर से भी मामले में कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और राजस्व विभाग की मापी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




