कोटा। राजस्थान के कोटा शहर के विज्ञान नगर थाना क्षेत्र में एक परिवार ने पड़ोसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि अवैध शराब बिक्री का विरोध करने की कीमत उन्हें लगातार मारपीट, जान से मारने की धमकियों और महिलाओं के साथ अभद्रता के रूप में चुकानी पड़ रही है। मामले में शिकायतें देने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
संजय गांधी नगर गली नंबर-3 निवासी मीनाक्षी नागर ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि 13 जून 2026 की रात करीब 9 बजे वह अपनी बहन पायल नागर के साथ घर के बाहर बैठी थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले विक्की, अजय, गजराज, पिंटू, ममता, प्रिंस समेत 10 से 12 अन्य लोग वहां पहुंचे और कथित रूप से गाली-गलौज तथा अभद्र व्यवहार करने लगे।
पीड़िता का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि अजय ने सरिये से सिर पर वार किया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और बाद में अस्पताल में टांके लगाने पड़े। वहीं विक्की पर छेड़छाड़ करने, कपड़े फाड़ने और अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया गया है। पीड़िता के अनुसार अन्य आरोपियों ने उन्हें पकड़ रखा था और दोनों बहनों को निर्वस्त्र कर घुमाने की धमकी दी।
मामले के दौरान शोर सुनकर मीनाक्षी की मां बबीता नागर और भाई संजय नागर बचाने पहुंचे तो उनके साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई। परिवार का आरोप है कि जाते समय आरोपी धमकी देकर गए कि यदि दोबारा शिकायत की गई तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा।
पीड़िता ने बताया कि घटना के तुरंत बाद वह अपने परिवार के साथ विज्ञान नगर थाने पहुंची थी, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने पहले इलाज कराने की सलाह देकर अगले दिन आने को कहा। अस्पताल में चिकित्सकों ने सिर में गंभीर चोट होने के कारण टांके लगाए। इसके बाद 14 जून को दोबारा शिकायत लेकर पहुंचने पर भी मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपियों का क्षेत्र में प्रभाव है और इसी कारण उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो रही है। परिवार ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी गजराज सिंह और पिंटू अवैध शराब के कारोबार से जुड़े हैं तथा उनके साथ काम करने वाले अन्य लोग भी परिवार को लगातार परेशान कर रहे हैं।
परिजनों के अनुसार घटना से दो दिन पहले भी मीनाक्षी के भाई संजय नागर के साथ मारपीट की गई थी। इतना ही नहीं, परिवार ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनके एक मकान पर कब्जा कर रखा है और वहां अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। परिवार का यह भी कहना है कि दो लाख रुपये के लेन-देन के मामले में लिखित समझौता होने के बावजूद केवल 50 हजार रुपये दिए गए और शेष रकम नहीं लौटाई गई।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हाल ही में पायल नागर पर भी सरिया लेकर हमला करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकली। लगातार मिल रही धमकियों के कारण पूरा परिवार भय और चिंता के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर है।
पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच, आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं मामले में सभी आरोप पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए हैं। पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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