Monday, October 12, 2026
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नौ साल की मेहनत के बाद नेशनल एथलेटिक्स में परवेज अली मंसूरी की एंट्री, अब 2028 ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतने का सपना

प्रयागराज के धावक परवेज अली मंसूरी ने 800 मीटर दौड़ में बनाई राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, परिवार के संघर्ष और हौसले को बताया अपनी ताकत, बोले हार नहीं माननी और देश के लिए मेडल जीतना है

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। कहते हैं कि अगर हौसले मजबूत हों और मेहनत करने का जुनून हो तो मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बन जाते हैं। इसी जज्बे की एक मिसाल प्रयागराज के युवा एथलीट परवेज अली मंसूरी पेश कर रहे हैं। करीब आठ से नौ साल तक लगातार मैदान में पसीना बहाने के बाद परवेज ने 800 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया है। अब उनका सपना केवल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ष 2028 के ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना और भारत के लिए मेडल जीतना भी है।

परवेज अली मंसूरी के पिता का नाम मोहम्मद जावेद है। परवेज का कहना है कि उनकी इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार का साथ और मुश्किल परिस्थितियों में भी हार नहीं मानने का जज्बा है। उन्होंने बताया कि खेल के सफर में कई समस्याएं आईं, लेकिन परिवार ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया और लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

800 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय स्तर पर मिला मौका

परवेज अली मंसूरी का चयन 6वीं इंडियन ओपन अंडर-23 एथलेटिक्स प्रतियोगिता 2026 के लिए दर्ज है। प्रतियोगिता का आयोजन 16 से 18 अक्टूबर 2026 तक जयपुर, राजस्थान में निर्धारित है। एथलीट के उपलब्ध प्रवेश विवरण के अनुसार, परवेज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का प्रतिनिधित्व करते हुए अंडर-23 पुरुष वर्ग की 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लेने जा रहे हैं। उनका दर्ज सीड टाइम 1 मिनट 52.74 सेकंड है।

करीब नौ वर्षों से खेल में मेहनत कर रहे परवेज के लिए यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि लंबे समय तक मैदान में अभ्यास करने और संघर्ष जारी रखने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिला है। यह उनके लिए एक पड़ाव है, मंजिल नहीं।

2028 ओलंपिक में देश के लिए खेलने का सपना

परवेज का लक्ष्य भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। उन्होंने अपने सपने के बारे में बताते हुए कहा कि वह वर्ष 2028 के ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना चाहते हैं और देश के लिए मेडल जीतना उनका सबसे बड़ा उद्देश्य है।

परवेज का मानना है कि किसी बड़े लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत करना और मानसिक रूप से मजबूत बने रहना जरूरी है। राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के बाद अब उनकी कोशिश अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने की है, ताकि आने वाले वर्षों में वह बड़े प्रतियोगिता मंचों पर देश के लिए दौड़ सकें।

परिवार को दिया सफलता का श्रेय

अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए परवेज भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि इस सफर में उनके परिवार ने जितना साथ दिया है, उसे शब्दों में बताना आसान नहीं है। उनके मुताबिक, परिवार ने उन्हें केवल सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि हर मुश्किल समय में हार न मानने की सीख भी दी।

परवेज ने बताया कि उनके परिवार ने कई परेशानियों का सामना किया। कुछ समस्याओं को उनसे छिपाया गया, जबकि कई परिस्थितियों के बारे में उन्हें बताया भी गया। इन सबके बावजूद परिवार ने उनका हौसला कमजोर नहीं होने दिया। परवेज के अनुसार, उनके घरवालों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया और लगातार मैदान में मेहनत करते रहने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धि के पीछे परिवार का योगदान बहुत बड़ा है। वह अपने संघर्ष और मेहनत का श्रेय घरवालों को देते हैं, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भी उनका साथ नहीं छोड़ा।
नौ साल तक मैदान से नहीं टूटा रिश्ता

परवेज ने बताया कि वह लगभग आठ से नौ वर्षों से खेल के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। उनके सफर में ऐसे दौर भी आए, जब परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन उन्होंने अभ्यास जारी रखा। उनका कहना है कि वह अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर रहे और मैदान से जुड़े रहे।

उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से पीछे हटने लगते हैं। परवेज का सफर बताता है कि किसी खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभा के साथ अनुशासन, निरंतर अभ्यास और परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अब मेडल जीतकर लौटने की उम्मीद

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रवेश मिलने के बाद परवेज के सामने अब अपने प्रदर्शन को साबित करने की चुनौती है। वह इस अवसर को अपने लंबे खेल सफर का अहम पड़ाव मानते हैं। उनका कहना है कि वह पूरी मेहनत और हौसले के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

परवेज का सपना है कि वह एक दिन भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दौड़ें और देश के लिए मेडल जीतें। वर्षों की मेहनत, परिवार के समर्थन और मजबूत इरादों के साथ वह इसी लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

प्रयागराज के इस युवा धावक की कहानी का सबसे अहम संदेश यही है कि सपने बड़े हों तो संघर्ष भी लंबा हो सकता है, लेकिन हार न मानने का जज्बा इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देता है। अब सभी की निगाहें जयपुर में होने वाली प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन पर रहेंगी।

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