Sunday, June 28, 2026
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सरकारी नलकूप पर दबंगों का कब्जा, ताले में कैद हुई सिंचाई, सूखने लगी धान और मक्का की फसल, किसानों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले से किसानों की परेशानियों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। मोहम्मदाबाद ब्लॉक के ग्राम नगला मन्न, मौजा सितवनपुर पिथू में सरकारी नलकूप पर कथित तौर पर दबंगों द्वारा कब्जा कर ताला लगाए जाने का आरोप लगा है। इससे दर्जनों किसानों की धान और मक्का की फसल सिंचाई के अभाव में सूखने लगी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शिकायत के बावजूद न तो सिंचाई विभाग ने कार्रवाई की और न ही प्रशासन ने समस्या का समाधान कराया। मजबूर होकर किसानों ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

शिकायत के अनुसार गांव में स्थापित सरकारी नलकूप संख्या 20 एफजी वर्षों से आसपास के लगभग 50 किसानों के खेतों की सिंचाई का प्रमुख साधन रहा है। किसानों का कहना है कि इस नलकूप के लिए ग्रामीण गिरीश चंद्र ने अपनी निजी जमीन उपलब्ध कराई थी, जिसके बाद यहां सरकारी ट्यूबवेल स्थापित किया गया था। लंबे समय तक इसका संचालन भी सुचारु रूप से होता रहा, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कुछ दबंग लोगों ने जबरन नलकूप की चाबी छीनकर उस पर अपना ताला लगा दिया और कब्जा कर लिया। इसके चलते सरकारी नलकूप बंद पड़ा है
सिंचाई अधिकारी नेम सिंह इन्होंने अपनी पहचान के गुंडे करवा के उसे पर ताला लगवाया सरकारी कर्मचारी होते हुए भी इस तरह की दबंगई दिखा रहे हैं और किसानों को समय पर सिंचाई नहीं मिल पा रही। धान की रोपाई के लिए तैयार पौध और मक्का की खड़ी फसल लगातार सूख रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से मदद मांगी तो संबंधित ट्यूबवेल ऑपरेटर ने पेट्रोल का खर्च देने की शर्त रख दी। किसानों का कहना है कि ऑपरेटर ने स्पष्ट कहा कि यदि पेट्रोल का पैसा नहीं मिलेगा तो वह नलकूप चलाने नहीं आएगा। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।

किसानों का आरोप है कि विभाग के अमीन और एसडीओ ने भी यही कहा कि यदि ग्रामीण पेट्रोल का खर्च देंगे तभी ऑपरेटर नलकूप का संचालन करेगा। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि जब सरकार ऑपरेटर को वेतन देती है तो फिर गरीब किसानों से अतिरिक्त पेट्रोल खर्च क्यों वसूला जा रहा है।

सबसे बड़ी विडंबना यह बताई जा रही है कि जिस किसान ने अपनी जमीन देकर सरकारी नलकूप लगवाने में सहयोग किया, आज उसी के खेत की फसल पानी के अभाव में सूख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि दबंगों के कब्जे और विभागीय लापरवाही के कारण पूरे गांव के किसान संकट में हैं।

मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में किसानों ने मांग की है कि सरकारी नलकूप पर कब्जा करने वाले आरोपितों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही ट्यूबवेल ऑपरेटर को तुरंत नलकूप चालू करने का आदेश दिया जाए, ताकि धान और मक्का की फसल को बचाया जा सके और किसानों को राहत मिल सके।

इस शिकायत पर अब किसानों की निगाहें प्रशासन और राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो सिंचाई के अभाव में दर्जनों किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से नहीं हुई है।

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