Friday, October 16, 2026
spot_img

Latest Posts

10 अक्टूबर को CJP Protest की अनुमति क्यों नहीं दी? दिल्ली के पुलिस कमिश्नर ने SC को बताया, जानें क्या कहा

दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी को 10 अक्टूबर को पुलिस ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी। दिल्ली के पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट को अपना जवाब दिया है। जानें पुलिस ने क्या बताया है?
दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अक्टूबर के CJP मार्च पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। CJP के 10 अक्टूबर के मार्च की अनुमति नहीं देने के फैसले का बचाव करते हुए पुलिस कमिश्नर ने कहा है, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जान-माल की सुरक्षा के लिए ये कदम उठाना जरूरी था। पुलिस ने दावा किया है कि CJP के पुराने प्रदर्शनों में हिंसा, संपत्ति को नुकसान और लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आईं थीं। ऐसे में राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी।
जुलाई में हुए मार्च को लेकर पुलिस ने किया दावा

पुलिस ने 20 जुलाई को NEET-UG पेपर लीक के मुद्दे पर निकाले गए CJP के ‘चलो संसद’ मार्च को अनधिकृत, गैरकानूनी और अवैध बताया है और आरोप लगाया कि जुलाई के मार्च में गैरकानूनी जमावड़ा हुआ था और उस दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले किए गए थे। पुलिस ने दावा किया, जुलाई में हुए इस विरोध प्रदर्शन में 240 से ज्यादा पुलिस अधिकारी और कर्मचारी घायल हुए थे। पुलिस ने दावों के समर्थन में तस्वीरों, वीडियो और अन्य सामग्री का हवाला दिया।

जून के प्रदर्शन को लेकर दिए गए आश्वासन का जिक्र
पुलिस के मुताबिक, CJP ने जून में हुए प्रदर्शन के लिए लिखित आश्वासन दिया था और आश्वासन था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और इसमें 1,000 से ज्यादा लोग शामिल नहीं होंगे। बिना पूर्व अनुमति संसद की ओर मार्च नहीं निकालने की भी दी गई थी सहमति, बाद में आश्वासन और निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया गया। पुलिस ने कोर्ट में दिए गए हलफनामे में 20 जुलाई के कथित अनधिकृत मार्च को 10 अक्टूबर को अनुमति नहीं देने का बताया आधार औऱ 6, 7 और 8 अक्टूबर के प्रदर्शनों का भी हवाला दिया।

पुलिस ने बताया-मार्च की वजह से लोगों को परेशानी हुई
पुलिस के मुताबिक, 6 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला गया था, 7 अक्टूबर को जनपथ से जंतर-मंतर तक मार्च हुआ, 8 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल से राजघाट की ओर प्रदर्शन किया गया। पुलिस प्रदर्शनों के कारण सेंट्रल दिल्ली में घंटों यातायात बाधित रहा। छात्रों और दूसरे यात्रियों को परेशानी हुई, कुछ लोग ट्रेन और फ्लाइट तक नहीं पकड़ सके। पुलिस ने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया। महिला पुलिस अधिकारियों के साथ बदसलूकी की, इन प्रदर्शनों में एक दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए।

10 अक्टूबर के मार्च को लेकर पुलिस की आशंका
पुलिस कमिश्नर ने बताया, जुलाई की घटना और अक्टूबर के शुरुआती प्रदर्शनों को ध्यान में रखकर खतरे का आकलन किया गया था और प्रस्तावित मार्च में हिंसा, पुलिस के साथ टकराव और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। पुलिस ने दिल्ली में संसद, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन और राजनयिक मिशनों की सुरक्षा का हवाला दिया और बताया कि, प्रदर्शन के अधिकार के साथ आम लोगों की सुरक्षा और यातायात बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।

प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पर पुलिस की सफाई
पुलिस ने दावा किया, खुफिया सूचनाओं और मौके की बदलती परिस्थितियों के आधार पर कार्रवाई की गई। BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू क्षेत्रों में कार्रवाई की गई। दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 का हवाला देकर लोगों को प्रदर्शन स्थल से हटाने को पुलिस ने सही ठहराया और कहा, वैध निर्देशों का विरोध करने या उनकी अवहेलना करने वाले लोगों को हटाया गया। हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ घंटों के भीतर छोड़ दिया गया। लोगों को लॉकअप या जेल में नहीं रखा गया इसके साथ ही हिरासत के दौरान भोजन देने और परिस्थितियां सामान्य होने पर जाने दिया गया।

नेताओं को भोजन, चाय, कॉफी और अन्य सुविधाएं

प्रदर्शन के दौरान हटाए गए राजनीतिक नेताओं को पुलिस थानों के कार्यालयों में रखा गया। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने कार्रवाई को समय पर, आनुपातिक और कानून के अनुरूप बताया और दावा किया कि, समय पर कार्रवाई से कानून-व्यवस्था का बड़ा संकट टल गया। इसके साथ ही कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस समाप्त करने की मांग की है।

Latest Posts

spot_imgspot_img

Don't Miss

Stay in touch

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.