मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसान आंदोलन पर उतर आए हैं और सीएम हाउस को घेरने की तैयारी में हैं। 2 हजार से ज्यादा किसान भोपाल की सड़कों पर डटे हुए हैं।
भोपाल में बड़े आंदोलन की तैयारी में किसान
किसानों की मांग- मूंग दाल की पूरी फसल MSP पर खरीदे सरकार
खाद के वितरण के लिए टोकन सिस्टम खत्म किए जाने की भी मांग
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 2 हजार से ज्यादा किसान सड़कों पर आ गए हैं। आज सुबह किसान संगठन एक बार फिर सीएम हाउस का घेराव करने निकलेंगे। बता दें कि किसान मूंग की 100 प्रतिशत खरीद की मांग को लेकर भोपाल पहुंचे हैं।
किसानों की क्या है मांग; क्यों कर रहे आंदोलन?
किसानों की मांग है कि सरकार मूंग दाल की पूरी फसल MSP पर खरीदे और खाद के वितरण के लिए टोकन सिस्टम खत्म किया जाए। इसी मांग को लेकर किसान संगठनों ने भोपाल चलो का ऐलान किया था। हालांकि पुलिस ने तैयारी की थी और भोपाल के तमाम रास्तों पर बैरीकेट्स लगाए गए थे। भोपाल के बॉर्डर को सील किया गया था लेकिन पुलिस के सारे इंतजाम बेकार साबित हुए और हजारों किसान बैरिकेडिंग तोड़ते हुए भोपाल में घुस गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को RRL तिराहे पर रोकने की कोशिश की तो पुलिस और किसानों के बीच भिड़ंत देखने को मिली। किसानों का कहना है कि वो बिना मांग पूरी हुए जाने वाले नहीं हैं।
बता दें कि फिलहाल किसान जितनी मूंग की पैदावार करते हैं, सरकार उसका 25 प्रतिशत MSP पर खरीदती है, बाकी किसान बाजारों में बेचते हैं। इससे किसानों को नुकसान होता है। हालांकि सरकार ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया, एग्रीकल्चर मिनिस्टर ने उनसे बात हुई और उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा दिया लेकिन किसानों का कहना है कि वो इस बार सरकार की बातों पर यकीन नहीं करेंगे, उन्हें लिखित में आश्वासन चाहिए।
किसानों का क्या कहना है?
किसानों का कहना है कि एक एकड़ में पांच क्विंटल मूंग पैदा होती है और इसकी लागत 20 हजार रुपए तक आती है लेकिन सरकार सिर्फ 1 क्विंटल 20 किलो मूंग खरीदती है। किसानों का कहना है कि वो कब तक नुकसान झेलेंगे।
मूंग की MSP- 8,668 रुपये
सरकारी खरीद की सीमा- 120 किलो/ एकड़
प्रति एकड़ औसत पैदावार- 5 क्विंटल
बाजार मूल्य- 5 से 6 हजार/ क्विंटल
किसानों को घाटा- 3 से 4 हजार/क्विंटल
मंगलवार को क्या हुआ?
बीती रात किसानों ने तिरपाल के बिस्तर बनाकर सोने का इंतजाम किया। तमाम जिलों से किसान दूसरे किसानों के लिए भोजन लाए और पंगत लगाकर एक लाइन में भोजन किया गया।
मंगलवार को 19 किसान संगठनों के करीब 2 हजार से ज्यादा किसान सड़कों पर उतर आए थे और सीएम हाउस के पास पहुंच गए थे। हालांकि पुलिस ने उन्हें रोक लिया था, जिसके बाद किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की भी हुई थी।
किसानों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद थे लेकिन किसानों के हौसले बुलंद नजर आए थे।
किसानों को रोकना आसान नहीं है क्योंकि वह अपने साथ 7 दिन का राशन-पानी लेकर आए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी मांगे पूरी होने तक वह पीछे नहीं हटेंगे।
पुलिस-प्रशासन ने किए सुरक्षा के सख्त इंतजाम
किसानों की भारी संख्या को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है और हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग मजबूत की गई है और वाटर कैनन और वज्र वाहन भी तैनात किए गए हैं।
इससे पहले किसान प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच 1 घंटे तक चली बैठक बेनतीजा रही।
होशंगाबाद रोड इलाका भारी जाम से रहा ग्रस्त
भोपाल का होशंगाबाद रोड इलाका भारी जाम से ग्रस्त रहा और ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।
इससे पहले जून में ही सीएम मोहन यादव की कैबिनेट में किसान कल्याण पर फोकस किया गया था और अहम फैसले लिए गए थे।




