Sunday, November 1, 2026
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भोपाल में रिहायशी इलाकों की दुकानों पर लगे ताले, नाराज व्यापारियों ने दी आत्महत्या की चेतावनी; रहवासियों ने भी खोला मोर्चा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन करने की मांग की है। हाथों में तख्तियां लेकर पैदल मार्च निकाल रहे रहवासी जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल के रिहायशी इलाकों की व्यावसायिक दुकानों को बंद करवाया जा रहा है। इस कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में भारी नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने उनका साथ नहीं दिया, तो वे आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश के भोपाल के रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले दुकान और प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम नए भोपाल के पॉश इलाके E4 में रिहायशी इलाके में बनी व्यावसायिक दुकानों को बंद करवा रहा है। E1 से E7 तक और रोहित नगर समेत तमाम इलाकों के व्यापारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने साथ नहीं दिया तो आत्महत्या कर लेंगे।

नगर निगम सिटी प्लानर ने इंडिया टीवी को बताया सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार कार्रवाई हो रही है। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। नगर निगम ने दुकानों को बंद कर पंचनामा चस्पा कर दिया है। दुकानों पर लिखा है कि यहां व्यावसायिक गतिविधियां बदं है। सुप्रीम कोर्ट को 4 अगस्त को एक्शन टेकना रिपोर्ट देना है।

“सरकार मास्टर प्लान लेकर नहीं आई”
तमाम व्यापारियों का कहना है कि सरकार की गलती है। सरकार मास्टर प्लान लेकर नहीं आई। वर्ष 2005 के बाद से 2026 तक पिछले 21 सालों से नया मास्टर प्लान लेकर नहीं आए।

एक व्यापारी ने कहा, “मैंने मेन रोड पर प्लॉट कमर्शियल समझ कर लिया था।” व्यापारियों ने कहा कि सरकार को गुजरात का मॉडल बनाना चाहिए, जहां कुछ शुल्क लेकर रिहायशी इलाकों की संपत्तियों को व्यावसायिक उपयोग के लिए नियमित कर दिया जाता है।

व्यापारियों का कहना है कि ऐसे हालात सिर्फ भोपाल में हैं, बाकी अन्य प्रदेशों और राज्यों में नहीं, क्योंकि वहां मास्टर प्लान लागू है। उन्होंने कहा कि हमारा पूरा नया भोपाल बंद है। 90 पर्सेंट दुकान बंद हो जाएगी। सरकार दूध-दवाई कहां से व्यवस्था करेगी। लोन चुका नहीं पा रहे हैं, रिकवरी वाले घर के आगे खड़े हैं, हम आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं।

“हमसे व्यावसायिक शुल्क लिया है”
उन्होंने कहा कि नगर निगम ने हमसे व्यावसायिक शुल्क लिया है। दुकान के लाइसेंस की फीस 12,000 रुपये सालाना ली जाती है और हम बिजली भी कमर्शियल रेट पर लेते हैं। E1 से लेकर E7 तक, एक महीने की सेल वैल्यू 300 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जिससे भारी-भरकम GST भी सरकार को मिलता है। BRTS और मेट्रो के आने के समय यह तय हुआ था कि हर 80 फीट की रोड पर मिक्स्ड लैंड यूज दिया जाएगा।

व्यापारियों ने कहा कि सरकार को अच्छा वकील खड़ा करना चाहिए, लेकिन साथ ही मिक्स्ड लैंड यूज़ को तुरंत लागू किया जाए, क्योंकि हम लोग पिछले 25 से 50 सालों से अपना धंधा कर रहे हैं। इससे 30,000 से 35,000 लोग प्रभावित हैं। ऐसा होने पर हर महीने हजारों-करोड़ों रुपये का नुकसान होगा और सभी के परिवारों को आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा। इस कार्रवाई से पूरा भोपाल बेरोजगार हो जाएगा। हम सब अपना खुद का रोजगार करते हैं और उन्हीं लोगों को नोटिस दिए गए हैं।

व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सड़क पर आए रहवासी
वहीं, भोपाल के गौतम नगर इलाके में रिहायशी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर रहवासी सड़कों पर उतर आए हैं। रहवासियों का कहना है कि ये अवैध दुकानें तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने नगर निगम की कार्रवाई को केवल एक दिखावा बताते हुए उस पर सवाल उठाए हैं और

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