Wednesday, October 28, 2026
spot_img

Latest Posts

सेना की ताकत बढ़ाने की तैयारी, 335 K9 वज्र तोपें और 200 स्वदेशी हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना

भारतीय सेना और वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए स्वदेशी रक्षा उपकरणों की खरीद पर जोर दिया जा रहा है। पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को बदलने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के लगभग 200 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना है।
नई दिल्ली: भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना अपने पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसी क्रम में दोनों सेनाएं सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित किए जा रहे लगभग 200 स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) खरीदने के लिए ऑर्डर दे सकती हैं।
400 हल्के हेलीकॉप्टरों की जरूरत
भारतीय सशस्त्र बलों को कुल मिलाकर लगभग 400 हल्के हेलीकॉप्टरों की जरूरत है। इनका इस्तेमाल ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में सैनिकों और सैन्य साजो-सामान को पहुंचाने, निगरानी करने और अन्य सामरिक अभियानों में किया जाता है। खासतौर पर चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऐसे हेलीकॉप्टरों की अहम भूमिका है।

खरीद के लिए टेंडर जारी
इससे पहले Defence AcquisitionCouncil (DAC) ने 200 लाइट मल्टीरोल हेलीकॉप्टर (LMRH) की खरीद के लिए मंजूरी दी थी। इसके बाद भारतीय सेना की ओर से खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए टेंडर जारी किए जाने की बात कही गई है। स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की खरीद से भारतीय सेना और वायुसेना की पुरानी होती हेलीकॉप्टर फ्लीट को बदलने में मदद मिलेगी। साथ ही, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा और विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करने का अवसर मिलेगा।

335 और K9 Vajra-T तोपों की खरीद को DAC की मंजूरी
भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट की ताकत बढ़ाने के लिए 335 और K9 Vajra-T सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोपों की खरीद को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने मंजूरी दी है। फिलहाल भारतीय सेना के पास K9 Vajra-T की पांच रेजिमेंट हैं। इन तोपों को रेगिस्तानी इलाकों से लेकर ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों तक तैनात करने की क्षमता विकसित की गई है।

K9 Vajra-T मूल रूप से दक्षिण कोरियाई कंपनी Hanwha की K9 Thunder तकनीक पर आधारित है। भारत में इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा किया जाता है। स्वदेशी निर्माण और तकनीकी सहयोग से तैयार ये तोपें भारतीय सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

K9 Vajra-T में 155 मिमी कैलिबर की 52-कैलिबर बैरल वाली गन लगी है। लगभग 50 टन वजनी यह सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी सिस्टम तेजी से अपनी पोजिशन बदलने और दुश्मन के ठिकानों पर प्रभावी गोलाबारी करने में सक्षम है। इसकी फायरिंग क्षमता लगभग 6 से 8 गोले प्रति मिनट बताई जाती है, जबकि गोला-बारूद और परिस्थितियों के आधार पर इसकी मारक दूरी लगभग 40 से 50 किलोमीटर तक हो सकती है।

335 अतिरिक्त K9 Vajra-T तोपों की खरीद से भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता को और मजबूती मिलेगी। खासतौर पर आधुनिक युद्धक्षेत्र में तेजी से गोलाबारी करने, दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने और अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य अभियानों को समर्थन देने में यह सिस्टम अहम भूमिका निभा सकता है।

बता दें कि हाल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक सोमवार 26 अक्टूबर को संपन्न हुई है। इस बैठक में भारतीय सेना, वायुसेना और भारतीय नौसेना के लिए 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इस फैसले की खास बात ये भी है कि कुल खरीद का करीब 82 प्रतिशत हिस्सा भारत के ही उद्योगों से प्राप्त किया जाएगा।

 

Latest Posts

spot_imgspot_img

Don't Miss

Stay in touch

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.