गाजियाबाद। ट्रांस हिंडन कमिश्नरेट के शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र से घरेलू हिंसा और आर्थिक प्रताड़ना का एक गंभीर मामला सामने आया है। साहिबाबाद के जनकपुरी निवासी मीनू ने अपने पति मुकेश पर वर्षों से मारपीट, गाली-गलौज, शराब के नशे में उत्पीड़न और परिवार की जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत और आवेदन दिए, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
मीनू के अनुसार, उनकी शादी को करीब 11 वर्ष हो चुके हैं और उनके तीन बच्चे हैं। उनका आरोप है कि पति मुकेश रोजाना शराब के नशे में घर लौटकर उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हैं, मारपीट करते हैं और बच्चों के साथ भी दुर्व्यवहार करते हैं। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से प्रताड़ना और अधिक बढ़ गई है, जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव और भय के माहौल में जीवन जीने को मजबूर है।
पीड़िता का आरोप है कि पति घर खर्च के लिए कोई आर्थिक सहयोग नहीं करते। बच्चों की पढ़ाई, मकान का किराया, घरेलू खर्च और अन्य सभी जिम्मेदारियां उन्हें अकेले उठानी पड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके नाम पर दो स्कूटी थीं, जिनकी किस्तें भी वह स्वयं जमा करती थीं, लेकिन आरोप है कि पति ने उनकी सहमति के बिना एक स्कूटी बेच दी।
मीनू का यह भी कहना है कि जिस फैक्ट्री में उनके पति काम करते थे, वहां से लगभग 20 हजार रुपये का कर्ज लिया गया था। अब फैक्ट्री प्रबंधन उनसे पैसे की मांग कर रहा है, जबकि उन्होंने कोई कर्ज नहीं लिया। इससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि लगातार हो रही प्रताड़ना के कारण बच्चों का भविष्य भी संकट में पड़ गया है।
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उन्होंने कई बार पुलिस और संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन हस्तक्षेप नहीं करता, तो उनके और उनके बच्चों के साथ कोई बड़ी अप्रिय घटना हो सकती है।
पीड़िता ने जिला प्रशासन, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और महिला सुरक्षा से जुड़े विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, घरेलू हिंसा के आरोपों पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने तथा उन्हें और उनके बच्चों को सुरक्षा एवं न्याय दिलाने की मांग की है।
समाचार लिखे जाने तक आरोपी पति की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं पुलिस की ओर से भी मामले में सार्वजनिक रूप से कोई बयान जारी नहीं किया गया है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।




