Friday, June 12, 2026
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MP में अब कितने भी बच्चे हों सरकारी नौकरी मिलेगी, दिग्विजय सिंह का 25 साल पुराना कानून रद्द होने पर क्या बोली कांग्रेस?

सीएम मोहन यादव के आदेश के मुताबिक एमपी में 2 से ज्यादा बच्चे होने पर भी अब सरकारी नौकरी मिल सकेगी। दिग्विजय सिंह के 25 साल पुराने इस नियम के निरस्त होते ही बीजेपी के फायरब्रांड विधायक रामेश्वर शर्मा मैदान में उतरे और उन्होंने कांग्रेस पर एक ऐसा हमला बोला जिसने पूरी डिबेट का रुख ही मोड़ दिया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के एक फैसले ने सूबे की सियासत का पारा 45 डिग्री के पार पहुंचा दिया है। सीएम मोहन यादव के आदेश के मुताबिक एमपी में 2 से ज्यादा बच्चे होने पर भी सरकारी नौकरी मिल सकेगी। जी हां, साल 2001 से लागू दिग्विजय सरकार का वो नियम अब इतिहास बनने जा रहा है, जिसके चलते 2 से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी मिलने पर रोक लगी थी। खबर सामने आते ही सियासत शुरू हो गई और सीधे जनसंख्या विस्फोट से लेकर हिंदू-मुस्लिम और UCC तक की एंट्री हो गई है।

दिग्विजय सिंह का कानून रद्द
मध्य प्रदेश की राजनीति में सीएम के एक आदेश ने सियासत गरमा दी है। इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए प्रस्तावित दो बच्चों की अधिकतम सीमा वाला प्रावधान लागू नहीं होगा। सीएम मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग के उस ड्राफ्ट को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं जिसमें 2 से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान था। सरकार इसे जनहित के कदम मान रही है।

BJP नेता ने दिग्विजय सिंह पर क्या आरोप लगाया?
दरअसल, साल 2001 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक नियम लागू किया था। नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद जिन सरकारी कर्मचारियों या उम्मीदवारों के दो से अधिक बच्चे होंगे, वे सरकारी सेवा के लिए पात्र नहीं होंगे। 25 साल पुराने इस नियम के निरस्त होते ही बीजेपी के फायरब्रांड विधायक रामेश्वर शर्मा मैदान में उतरे और उन्होंने कांग्रेस पर एक ऐसा हमला बोला जिसने पूरी डिबेट का रुख ही मोड़ दिया। रामेश्वर शर्मा ने सीधा आरोप लगाया कि यह दिग्विजय सिंह का हिंदू विरोधी षड्यंत्र था।

कांग्रेस बोली- RSS का एजेंडा, हिंदू-मुस्लिम कराने की तैयारी
दिग्विजय सिंह का फैसला दरअसल जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर लिया गया था। भाजपा के मुताबिक खामियाजा प्रदेश के युवा और कर्मचारी भुगत रहे थे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस का सीधा आरोप है कि यह बीजेपी का नहीं, बल्कि आरएसएस का एजेंडा है। कांग्रेस पूछ रही है कि रोजगार पोर्टल पर जो 22 लाख युवा रजिस्टर्ड हैं, उन्हें नौकरी कब मिलेगी। देश में हर साल 2 करोड़ नौकरियों का जो वादा था, वो कहां गया। विपक्ष का आरोप है कि मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हिंदू मुस्लिम कार्ड खेला जा रहा है।

हजारों परिवारों को मिली राहत
इस सियासी रार के बीच इस फैसले का स्वागत भी हो रहा है। मध्य प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने इसे दिग्विजय सिंह का काला कानून करार दिया है। संगठनों के मुताबिक सरकार के 58 विभागों में से 38 विभाग ऐसे थे, जहां हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई थी, और कई मामले सालों से कोर्ट में धूल फांक रहे थे। इस आदेश से उन हजारों परिवारों को संजीवनी मिल गई है।

हिंदू संगठनों ने किया फैसले का स्वागत
​लेकिन बात सिर्फ नौकरी की राहत तक नहीं रुकी। मोहन यादव के इस फैसले के बाद हिंदू संगठन भी मैदान में कूद पड़े हैं। हिंदू संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए एक नया और बेहद विवादित मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि दिग्विजय सिंह का यह कानून सिर्फ हिंदुओं की आबादी घटाने का षड्यंत्र था, क्योंकि दूसरी तरफ 5 बीवी और 25 बच्चे वाले लोग इस नियम के दायरे से बाहर थे। हिंदू संगठनों की मांग है कि अब सरकार को 4 बच्चों की छूट देने वाला नया जनसंख्या नियंत्रण कानून लाना चाहिए।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की सियासत में अब बच्चे भी राजनीति का नया अखाड़ा बन गए हैं। एक नियम जो 25 साल पहले जनसंख्या को थामने के लिए बना था वो आज हिंदू मुस्लिम और संघ के एजेंडे के आरोपों की भेंट चढ़ चुका है। सवाल है कि मोहन यादव का यह मास्टरस्ट्रोक मध्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार देता है या फिर सूबे की सियासत को एक नए ध्रुवीकरण की आग में झोंकता है।

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