Wednesday, July 8, 2026
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गर्भवती महिला पर बेरहमी से हमला, पेट पर लाठी-डंडों से किए वार, गर्भस्थ दो माह के शिशु की मौत का आरोप, पुलिस ने दर्ज की सिर्फ एनसीआर, न्याय के लिए दर-दर भटक रही पीड़िता

गोंडा।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में गर्भवती महिला के साथ कथित रूप से हुई बेरहमी से मारपीट का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि पारिवारिक विवाद को लेकर चार लोगों ने मिलकर उस पर हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने यह जानते हुए भी कि वह गर्भवती है, उसके पेट पर लाठी-डंडों से कई वार किए, जिससे उसके गर्भ में पल रहे लगभग दो माह के शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद भी पुलिस ने केवल एनसीआर दर्ज कर मामूली धाराएं लगाईं, जिससे पीड़िता और उसके परिवार में भारी आक्रोश है।

पीड़िता सीमा तिवारी पत्नी श्रद्धानंद तिवारी, निवासी निरंजन तिवारी पुरवा, मौजा पकवानगांव, थाना उमरी बेगमगंज, जनपद गोंडा ने उच्च अधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 30 जून 2026 की सुबह करीब 9 बजे मकान के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि सत्यनंद तिवारी, जनार्दन तिवारी, दुर्गेश तिवारी तथा रागिनी ने मिलकर उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।

पीड़िता का आरोप है कि सत्यनंद तिवारी ने पहले उन पर साइकिल फेंककर हमला किया और उसके बाद लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा। सबसे गंभीर आरोप यह है कि उसने जानबूझकर पीड़िता के पेट पर कई वार किए, जबकि उसे पहले से पता था कि वह गर्भवती है। हमले के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई और उन्हें उपचार के लिए महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान गर्भस्थ लगभग दो माह के शिशु की मृत्यु होने की जानकारी मिली।

सीमा तिवारी का कहना है कि घटना की सूचना तत्काल थाना उमरी बेगमगंज पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए केवल एनसीआर संख्या 0180 दर्ज की। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 351(3) और 352 लगाई गई हैं। पीड़िता का आरोप है कि गर्भस्थ शिशु की मृत्यु जैसी गंभीर घटना होने के बावजूद पुलिस ने अब तक न तो उचित धाराएं जोड़ीं और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी की।

शिकायत के अनुसार, घटना के बाद से आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे पीड़िता और उसके परिवार में भय का माहौल है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ और उन्हें धमकाने की आशंका बनी हुई है।

पीड़िता ने पुलिस प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, उपलब्ध चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर गर्भस्थ शिशु की मृत्यु से संबंधित गंभीर कानूनी धाराएं जोड़ी जाएं, सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए तथा उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

मामले में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, घटना 30 जून 2026 की सुबह लगभग 9 बजे हुई थी। पुलिस ने उसी दिन दोपहर बाद सूचना दर्ज करते हुए जांच उपनिरीक्षक थाने में सौंपी गई है। हालांकि पीड़िता का आरोप है कि जांच में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है।

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