गौतमबुद्धनगर। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के जेवर क्षेत्र से जमीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। करीब 80 वर्षीय किसान राजपाल मीना ने पुलिस आयुक्त से शिकायत कर आरोप लगाया है कि सिविल न्यायालय का आदेश और राजस्व अभिलेख उनके पक्ष में होने के बावजूद उनकी कृषि भूमि पर कथित रूप से दबंगों ने कब्जा कर लिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई बार शिकायतें, राजस्व अधिकारियों की जांच और न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें आज तक न्याय नहीं मिल सका।
शिकायतकर्ता राजपाल मीना, निवासी ग्राम सिरसा मांचीपुर, पोस्ट जेवर, तहसील जेवर, जिला गौतमबुद्धनगर ने आरोप लगाया है कि उनकी खाता संख्या 136 के अंतर्गत गाटा संख्या 139 एवं गाटा संख्या 156/2 की भूमि पर सुरता परवीन, अनवर अली सहित अन्य लोगों ने कथित रूप से बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पहुंचकर कब्जा कर लिया। उनका दावा है कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
राजपाल मीना का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल सहित कई माध्यमों से शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार राजस्व विभाग द्वारा मौके की जांच भी की गई थी और विवादित भूमि पर किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करने के निर्देश भी दिए गए थे। शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्ष 2012 में सिविल न्यायालय से भी उनके पक्ष में आदेश पारित हो चुका है, जिसमें प्रतिवादी पक्ष को भूमि में हस्तक्षेप न करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कथित रूप से उनकी खड़ी फसल जोतकर भूमि पर कब्जा कर लिया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रतिवादी पक्ष राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाता रहा, जिसके कारण उन्हें वर्षों से न्याय नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि कई बार प्रार्थना पत्र देने और न्यायालय के आदेश होने के बावजूद आज तक विवाद का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
राजपाल मीना ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, भूमि से जुड़े सभी अभिलेख, खतौनी, लगान रसीद, न्यायालय के आदेश और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल यह मामला विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी है। दूसरी ओर इस मामले में प्रतिवादी पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




