Thursday, October 29, 2026
spot_img

Latest Posts

ठगी होने पर बैंक को लौटाना पड़ेगा पैसा? सुप्रीम कोर्ट की डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी पर सख्ती दिखाते हुए बैंकों को संदिग्ध लेन-देन रोकने और लापरवाही से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा नियम बनाने पर RBI से विचार करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बैंक की लापरवाही से साइबर ठगी हुई तो पीड़ित को मुआवजा मिलना चाहिए।
CJI सूर्यकांत ने पूछा, जब मोबाइल से गिरफ्तारी नहीं होती, तो लोग ठगों पर भरोसा क्यों करते हैं?
कोर्ट ने RBI से मुआवजे के नियमों पर विचार करने को कहा और अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची मांगी।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही साइबर ठगी पर गहरी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी कि CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने कहा कि जागरूकता अभियान चलाए जाने और इस तरह की ठगी की खबरें लगातार सामने आने के बावजूद लोग इसका शिकार हो रहे हैं। कोर्ट ने संदिग्ध बैंक लेन-देन को समय रहते रोकने और साइबर ठगी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए नियम बनाने पर जोर दिया। बता दें कि हाल ही में CJI ने कहा था कि डिजिटल अरेस्ट पर न्यायपालिका सक्रिय है और संसद के कानून का इंतजार नहीं कर सकती।
मोबाइल पर कोई गिरफ्तार कैसे हो सकता है?’
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि लोग कैसे मान लेते हैं कि उन्हें मोबाइल फोन के जरिए गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लगातार जागरूकता फैलाए जाने के बावजूद लोग इस तरह की ठगी को समझ क्यों नहीं पा रहे हैं। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच कर रही थी। कोर्ट को बताया गया कि हाल ही में एक महिला डिजिटल अरेस्ट स्कैम में 2.5 करोड़ रुपये गंवा बैठी।

संदिग्ध लेन-देन को तुरंत रोकने की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी खाते से ऐसा लेन-देन होता है, जो खाताधारक के पुराने लेन-देन से बिल्कुल अलग है, तो बैंक उसे तुरंत रोककर उसकी जांच क्यों नहीं कर सकते? कोर्ट ने कहा कि ठगी होने के बाद केवल रिपोर्ट तैयार करना काफी नहीं है। जरूरी है कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोका जाए, ताकि लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।

पैसे भेजने से पहले जांच हो, पुलिस को भी मिले सूचना
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संदिग्ध लेन-देन की जानकारी संबंधित पुलिस स्टेशन को दी जानी चाहिए। साथ ही, पैसे भेजने से पहले लेन-देन की वास्तविकता की जांच की जानी चाहिए। कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि बैंक और संबंधित वित्तीय संस्थान संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज न करें। समय रहते जांच और कार्रवाई होने से साइबर ठगी को रोका जा सकता है और पीड़ितों को होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।

बैंक की लापरवाही पर देना पड़ सकता है मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह ऐसे मामलों में बैंकों को पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराने पर विचार कर रहा है, जहां बैंक की लापरवाही के कारण साइबर ठगी हुई हो। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर बैंक जरूरी सावधानी बरतने में नाकाम रहते हैं और इसके कारण किसी व्यक्ति के साथ ठगी होती है, तो बैंक को पीड़ित का पैसा लौटाने और कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए जिम्मेदार बनाया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने कहा, ‘RBI के दायरे में आता है मामला’
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि बैंकों की जिम्मेदारी तय करने और इस संबंध में जरूरी नियम बनाने का मामला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दायरे में आता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने RBI से साइबर ठगी के पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने जोर दिया कि ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए, जिनसे वित्तीय संस्थानों की लापरवाही के कारण नुकसान उठाने वाले लोगों को राहत मिल सके।

RBI से मुआवजे के नियम बनाने पर विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित नियमों में यह प्रावधान होना चाहिए कि अगर किसी वित्तीय संस्था की लापरवाही से साइबर ठगी होती है, तो पीड़ित को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। कोर्ट ने RBI से अगली सुनवाई पर सभी अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची भी पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि RBI केवाईसी यानी अपने ग्राहक को जानने से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए प्रस्तावित निर्देश जारी करने की तैयारी कर रहा है। ये निर्देश 30 नवंबर तक जारी होने की उम्मीद है और दिसंबर में इन्हें लागू किया जा सकता है।

इस साल साइबर ठगी से करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस साल साइबर ठगी के ऐसे मामलों से भारतीय अर्थव्यवस्था को करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बता दें कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग अक्सर खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे पैसे ऐंठते हैं। ऐसे मामलों में यह समझना जरूरी है कि केवल फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर पैसे भेजने के बजाय संबंधित पुलिस या आधिकारिक एजेंसी से संपर्क करना चाहिए।

Latest Posts

spot_imgspot_img

Don't Miss

Stay in touch

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.