Friday, November 6, 2026
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धनतेरस के शुभ अवसर पर संस्थान परिसर में कार्यालय कर्मचारियो द्वारा वृक्षारोपण किया गया।

धनतेरस पर IEHE परिसर में रोपे गए जीवनदायी वृक्ष, मां के नाम लगाया पौधा, संरक्षण का लिया संकल्प

शमी, रुद्राक्ष, तेजपत्ता और सिंदूर सहित कई प्रजातियों के पौधों का रोपण; संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रकृति को दिया हरियाली का उपहार

भोपाल। दीपावली का पर्व जहां धन, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है, वहीं उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (Institute for Excellence in Higher Education), भोपाल में इस बार धनतेरस को प्रकृति के सबसे अनमोल धन यानी हरियाली के नाम समर्पित किया गया। संस्थान परिसर में आयोजित विशेष पौधरोपण गतिविधि के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस पहल की विशेषता यह रही कि प्रत्येक सहभागी ने मां लक्ष्मी के स्वागत के साथ अपनी मां के सम्मान में भी एक-एक पौधा लगाया और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने का संकल्प किया।

संस्थान के प्रभारी संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में परिसर में पहले से ही लगातार पौधरोपण और हरित वातावरण विकसित करने की गतिविधियां संचालित की जाती रही हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए धनतेरस पर शमी, रुद्राक्ष, तेजपत्ता और सिंदूर सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए।

धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

इस पौधरोपण की खास बात यह रही कि इसमें ऐसे वृक्षों को प्राथमिकता दी गई, जिनका भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, औषधीय उपयोग और प्राकृतिक पर्यावरण में विशेष महत्व है।

शमी का वृक्ष भारतीय परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा रही है। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह वृक्ष महत्वपूर्ण है। इसकी विशेषता यह है कि यह कम पानी और कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी जीवित रह सकता है। इसकी जड़ें मिट्टी को बांधने और मरुस्थलीय क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती हैं।

रुद्राक्ष का वृक्ष भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है। इसके फल से रुद्राक्ष प्राप्त होता है, जिसका उपयोग पूजा और ध्यान में किया जाता है। यह सदाबहार प्रकृति का वृक्ष है और परिसर की जैव विविधता बढ़ाने में भी योगदान दे सकता है।

तेजपत्ता यानी तेजपत्र का वृक्ष भारतीय रसोई और पारंपरिक उपयोगों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसकी पत्तियों का उपयोग मसालों के रूप में किया जाता है। यह सुगंधित पत्तियों वाला सदाबहार वृक्ष है।

इसी तरह सिंदूर का वृक्ष भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। इसकी फलियों से प्राकृतिक रंगद्रव्य प्राप्त होता है, जिसका पारंपरिक रूप से विभिन्न उपयोगों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस तरह विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण परिसर की हरित संपदा और वनस्पति विविधता को समृद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

मां के नाम पौधा, केवल रोपण नहीं संरक्षण की जिम्मेदारी भी

संस्थान के रजिस्ट्रार दिलीप तिवारी (मंजू) ने इस पहल के संबंध में बताया कि एक पेड़ मां के नाम अभियान का उद्देश्य पौधरोपण को केवल औपचारिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए उसे भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि इस दीपावली पर सभी ने अपनी मां के सम्मान में एक-एक पौधा लगाया है। मां जिस तरह अपने बच्चों का पालन-पोषण करती हैं, उसी तरह पेड़ भी बिना किसी स्वार्थ के मानव जीवन को प्राणवायु, छाया, फल और जीवन का आधार देते हैं। इसलिए पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित देखभाल और संरक्षण करना भी उतना ही आवश्यक है।

अधिकारियों और कर्मचारियों ने निभाई सहभागिता

इस अवसर पर प्रभारी संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में कार्यालयीन स्टाफ और संस्थान से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की।

इस दौरान श्री रजिस्ट्रार दिलीप तिवारी (मंजू), श्री हरे सिंह चौहान (निज सहायक), श्री अनोप सिंह माणिक (कंप्यूटर ऑपरेटर), श्री रोहित पाण्डेय (कंप्यूटर ऑपरेटर) एवं श्री पंचम विश्वकर्मा (भृत्य) सहित संस्थान के अन्य सदस्यों ने पौधरोपण गतिविधि में भाग लिया।

इसके साथ ही श्रीमती तुलसी पाल, साक्षी गुप्ता, उदय नापित, उन्नति गजभिये और गायत्री पाण्डेय सहित अन्य सदस्यों ने भी इस पर्यावरणीय पहल में सहभागिता की।

दीपावली का सबसे अनमोल उपहार है हरियाली

धनतेरस पर सोना-चांदी और अन्य वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है, लेकिन प्रकृति के लिए सबसे बड़ा धन पेड़-पौधे और हरियाली हैं। वृक्ष न केवल वातावरण को शुद्ध करने में सहायक हैं, बल्कि तापमान संतुलन, जैव विविधता, मिट्टी संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी आवश्यक हैं।

संस्थान की यह पहल संदेश देती है कि त्योहारों की खुशियां केवल स्वयं तक सीमित न रहें, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में भी सामने आएं। मां के नाम लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाले वर्षों में छाया, हरियाली और जीवन का आधार बनेगा।

इस दीपावली का संकल्प यही है कि मां के सम्मान में लगाया गया पौधा केवल एक दिन की याद न बने, बल्कि जीवनभर उसकी देखभाल की जाए।

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