पुराणों में संकटनाशन गणेश स्तोत्र बेहद प्रभावशाली स्तोत्र माना गया है। कहते हैं जो भी व्यक्ति इसका सच्चे मन से पाठ करता है उसके जीवन के सारे संकटों का नाश हो जाता है। वैसे तो इस स्तोत्र का पाठ आप किसी भी दिन कर सकते हैं। लेकिन बुधवार, गणेश चतुर्थी, विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी के दिन इसका पाठ करना सर्वश्रेष्ठ होता है। आज विभुवन संकष्टी चतुर्थी है ऐसे में आज के दिन तो जरूर ही इसका पाठ करें।
कहते हैं इस स्तोत्र में इतनी अपार शक्ति है कि जो भी इसका पाठ करता है उसके भीतर की नकारात्मकता खत्म हो जाती है और सफलता के द्वार खुलने लगते हैं। आइए जानते हैं इसके संपूर्ण लिरिक्स और इसे पढ़ने के नियम।
प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम ।
भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम ।
तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥2॥
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ॥3॥
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर: ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ॥7॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥8॥
॥ इति श्रीनारदपुराणे संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥




