Tuesday, August 18, 2026
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DCLR के आदेश के 8 साल बाद भी जमीन पर नहीं मिला कब्जा, आशिक बोले: न्याय के लिए भटक रहा परिवार, हर जगह लगाई गुहार

मधेपुरा के चंडीटोला का मामला, कोर्ट ने पर्चाधारी के पक्ष में आदेश देकर अमीन से मापी कराकर दखल-कब्जा दिलाने का दिया था निर्देश

मधेपुरा, बिहार। जमीन पर अधिकार होने के बावजूद कब्जा पाने के लिए पिछले करीब आठ वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे मोहम्मद आशिक अब न्याय की गुहार लगा रहे हैं। चौसा थाना क्षेत्र के चंडीटोला मुसहरी निवासी आशिक का आरोप है कि भूमि विवाद मामले में उनके पक्ष में आदेश होने के बावजूद अब तक उन्हें जमीन पर दखल-कब्जा नहीं दिलाया गया। उनका कहना है कि शिकायत और आवेदन देने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर उन्हें लगातार आज-कल कहकर टाला जा रहा है।

DCLR कोर्ट ने पर्चे के आधार पर कब्जा दिलाने का दिया था आदेश

उपलब्ध न्यायालयीन दस्तावेजों के अनुसार भूमि सुधार उप समाहर्ता, उदाकिशुनगंज के न्यायालय में भूमि विवाद वाद संख्या 10/2015-16 में मोहम्मद आशिक बनाम योगेन्द्र भगत एवं अन्य मामले की सुनवाई हुई थी। 22 दिसंबर 2016 के आदेश में न्यायालय ने मामले को स्वीकार करते हुए अंचल अधिकारी, चौसा को निर्देश दिया था कि पर्चाधारी को पर्चे के अनुरूप अंचल अमीन से जमीन की मापी कराकर दखल-कब्जा दिलाना सुनिश्चित किया जाए।

आदेश में संबंधित अधिकारियों को अनुपालन के लिए सूचना भेजे जाने का भी उल्लेख है। आशिक का कहना है कि न्यायालय का आदेश मिलने के बाद भी जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

पर्चा, मालगुजारी रसीद और अमीन की रिपोर्ट का हवाला

आशिक की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में वासगीत पर्चा, मालगुजारी रसीद, अंचल अमीन की मापी रिपोर्ट और जनता दरबार में दिए गए आवेदन की प्रतियां शामिल होने की बात कही गई है। न्यायालय के आदेश में भी यह उल्लेख किया गया कि वादी के पक्ष का वासगीत पर्चा सक्षम न्यायालय से निरस्त नहीं हुआ था।

मामले में प्रतिवादी पक्ष की ओर से जमीन को निबंधित केवाला के माध्यम से खरीदे जाने और जमाबंदी व मालगुजारी रसीद अपने नाम होने का दावा किया गया था। यानी जमीन को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे रहे हैं।

पंचायत से लेकर अंचल कार्यालय तक लगाई गुहार

आशिक के अनुसार जमीन को लेकर पहले गांव में पंचायत भी हुई थी। उनका आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने पंचायत में जमीन खाली करने की बात कही, लेकिन बाद में ऐसा नहीं किया। इसके बाद उन्होंने अंचल कार्यालय और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

आशिक का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने अंचलाधिकारी चौसा से भी दखल-कब्जा दिलाने की मांग की, लेकिन उन्हें अब तक जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया है।

अब डीएम से लगाई गुहार, सुरक्षा की भी मांग

आशिक ने जिला पदाधिकारी मधेपुरा को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि जमीन विवाद के कारण उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है और जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। उन्होंने अपने और परिवार के जान-माल की सुरक्षा की मांग की है।

आशिक का कहना है कि करीब आठ साल से वह न्याय और अपने अधिकार के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। अब उन्होंने डीएम से हस्तक्षेप कर कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने और अंचल अधिकारी चौसा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।

आठ साल से एक ही सवाल, आखिर कब मिलेगा जमीन पर कब्जा

आशिक का कहना है कि न्यायालय का आदेश होने के बावजूद यदि उसे जमीन पर अमल में नहीं लाया जाता है तो आम आदमी के लिए न्याय पाने की प्रक्रिया कितनी मुश्किल है, यह उनकी स्थिति से समझा जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से मामले की मौके पर जांच कराने, न्यायालय के आदेश के अनुसार मापी और सीमांकन कराकर दखल-कब्जा दिलाने तथा सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

मामले में विपक्षी पक्ष और संबंधित अंचल अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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