इसराना थाना क्षेत्र के गांव मांडी में एक व्यक्ति द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने के बाद मामला गंभीर आरोपों में उलझ गया है। मृतक अजमेर सिंह की पत्नी सोनू देवी का आरोप है कि पति को लंबे समय से कई लोगों द्वारा प्रताड़ित और मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। पत्नी के मुताबिक पति ने आत्महत्या से पहले एक कथित सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें कई लोगों के नाम लिखकर उन्हें अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया गया है। मामले में पुलिस ने 9 जुलाई 2026 को धारा 108 और 351(3) BNS के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी दी है।
परिवार के मुताबिक अजमेर सिंह पुत्र राम सरूप निवासी गांव मांडी ने करीब 7 जुलाई 2026 की रात अपने घर के बाहर बरामदे में लोहे के कुंडे से रस्सी के सहारे फांसी लगा ली। पत्नी सोनू देवी का कहना है कि रात करीब दो बजे उसकी आंख खुली तो पति चारपाई पर नहीं थे। कमरे से बाहर निकलकर देखा तो अजमेर सिंह बरामदे के बाहर लोहे के कुंडे से लटके हुए थे। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और तत्काल अपने देवर सहदेव के घर पहुंची। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस मौके पर पहुंची।
पत्नी का दावा है कि पति पिछले काफी समय से मानसिक रूप से परेशान थे। जब उसने पति से उनकी परेशानी का कारण पूछा तो उन्होंने कथित तौर पर बताया था कि परिवार और रिश्तेदारों सहित कुछ अन्य लोग उन्हें लगातार परेशान और टॉर्चर कर रहे हैं। सोनू देवी के अनुसार पति ने उससे यह भी कहा था कि वह एक दिन आत्महत्या कर लेंगे। पत्नी ने उन्हें काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार 7 जुलाई की रात उन्होंने कथित तौर पर फांसी लगाकर जान दे दी।
गोद ली बेटी से जुड़े मामले के बाद बढ़ा तनाव
शिकायत में सोनू देवी ने बताया कि उसकी और अजमेर सिंह की अपनी कोई संतान नहीं थी। वर्ष 2018 में दोनों ने अजमेर सिंह की बहन सुमन की बेटी लक्षिता देवी को गोद लिया था। उस समय बच्ची की उम्र करीब आठ वर्ष बताई गई है। महिला का आरोप है कि बाद में लक्षिता के साथ गांव दुपेडी में दुष्कर्म की घटना हुई, जिसके संबंध में महिला असंध थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। शिकायत के अनुसार मुकदमा नंबर 34 दिनांक 14 जून 2025 में विभिन्न धाराओं और POCSO Act के तहत कार्रवाई हुई थी तथा एक आरोपी की गिरफ्तारी भी बताई गई है।
परिवार का कहना है कि इस मुकदमे के बाद से अजमेर सिंह पर कथित तौर पर दबाव और मानसिक प्रताड़ना बढ़ गई थी। गोद ली हुई बेटी काफी समय से बाल भवन करनाल में रह रही है। पत्नी के अनुसार इसी पूरे घटनाक्रम के चलते पति तनाव में रहते थे और उन्हें लगातार धमकियों तथा प्रताड़ना का डर बना हुआ था।
सुसाइड नोट में कई लोगों के नाम लिखे होने का दावा
सोनू देवी का कहना है कि पति की मौत के बाद उन्हें एक कथित सुसाइड नोट मिला, जिसमें अजमेर सिंह ने अपनी मौत के लिए कई लोगों को जिम्मेदार बताया है। शिकायत में वेदपाल, ममता, कृष्ण, सुमन, जगदीश मास्टर, सतीश उर्फ कल्लू, करनैल, रोहित वाल्मीकि के भाई व माता-पिता, उमेश चाना, चंद्र प्रकाश और P.R. नाथ समेत कुछ अन्य लोगों तथा असंध पुलिस से कथित प्रताड़ना का उल्लेख होने की बात कही गई है।
शिकायत के मुताबिक कथित सुसाइड नोट में पत्नी सोनू देवी और गोद ली हुई बेटी लक्षिता की सुरक्षा को लेकर भी खतरा जताया गया है। परिवार का आरोप है कि जिन लोगों के नाम शिकायत में दिए गए हैं, उनसे महिला और उसकी बेटी को भी खतरा बना हुआ है। इसी वजह से परिवार अब पुलिस प्रशासन से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
पत्नी बोली पहले होश में नहीं थी, अब सामने आया सुसाइड नोट
सोनू देवी ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि पति की मौत के बाद वह बेहद सदमे में थी और पूरी तरह होश-हवास में नहीं थी। उसका कहना है कि उस समय पुलिस ने उसका बयान दर्ज किया था, लेकिन उसे ठीक से याद नहीं कि उसने क्या बयान दिया था। बाद में कथित सुसाइड नोट मिलने के बाद उसने पुलिस के सामने पूरी जानकारी रखते हुए कार्रवाई की मांग की।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 8 जुलाई 2026 को अजमेर सिंह की मौत के संबंध में धारा 194 BNSS के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके बाद 9 जुलाई को सोनू देवी की शिकायत पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया धारा 108 और 351(3) BNS के तहत अपराध बनना पाए जाने पर मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर भेजी। रिकॉर्ड में मुकदमा नंबर 191 दिनांक 9 जुलाई 2026 दर्ज होने का उल्लेख है।
परिवार को अब निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की उम्मीद
पीड़ित परिवार का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है और परिवार की महिला तथा गोद ली हुई बेटी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। परिवार चाहता है कि कथित सुसाइड नोट की जांच कराई जाए, उसमें लिखे नामों और आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल हो तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
परिजनों का कहना है कि उन्हें न्याय के लिए लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है और वे प्रशासन से समय रहते मदद चाहते हैं। परिवार की मांग है कि जांच में किसी प्रकार का दबाव न हो और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों और उसमें दर्ज नामों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि अजमेर सिंह को कथित रूप से किन परिस्थितियों में आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।




